देश-विदेश
संसद में पहले दिन ही हंगामा: ऑपरेशन सिंदूर पर गरमाई राजनीति
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में भूचाल: खड़गे बोले “हमले के आतंकी ज़िंदा घूम रहे हैं”
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन लोकसभा और राज्यसभा में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर विपक्ष ने दोनों सदनों में जोरदार विरोध दर्ज किया और चर्चा की मांग की।राज्यसभा में खड़गे का हमला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में कहा:“पहलगाम हमले के आतंकी अब तक न पकड़े गए हैं, न मारे गए। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने खुद इंटेलिजेंस फेल्योर की बात मानी है। केंद्र सरकार जवाब देने से बच नहीं सकती।”उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प का भी जिक्र करते हुए कहा कि वे “24 बार कह चुके हैं कि हमने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया” – सरकार को इस पर भी जवाब देना चाहिए।
नड्डा का पलटवार: सरकार चर्चा से भाग नहीं रही
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सदन में स्पष्ट किया कि:“देश को ये संदेश नहीं जाना चाहिए कि सरकार पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा से भाग रही है। हम हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं और सभी तथ्यों को देश के सामने रखेंगे।”
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का बयान
लोकसभा में हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिड़ला ने विपक्ष को संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल के बाद ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा होगी और सरकार हर सवाल का जवाब देगी।“पहले दिन से हंगामा करना अनुचित है। हमें इस रवैये से ऊपर उठना चाहिए और सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।”
I.N.D.I.A गठबंधन की रणनीति: सरकार को घेरने की तैयारी
सत्र शुरू होने से पहले I.N.D.I.A. गठबंधन ने एक अहम बैठक कर संसद में सरकार को चारों ओर से घेरने की रणनीति बनाई। एजेंडे में शामिल प्रमुख मुद्दे: ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमला, भारत‑पाकिस्तान संघर्ष विराम ट्रम्प के ‘सीजफायर’ दावे,बिहार की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी, विपक्ष की मांग है कि प्रधानमंत्री स्वयं इन विषयों पर संसद में जवाब दें।मानसून सत्र का एजेंडा: 32 दिन, 18 बैठकें, 15+ विधेयक
21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में कुल 32 दिन होंगे, जिनमें 18 बैठकें होंगी। केंद्र सरकार 8 नए विधेयक पेश करेगी और 7 लंबित विधेयकों पर चर्चा होगी।महत्वपूर्ण विधेयकों में शामिल हैं
- मणिपुर GST संशोधन बिल 2025
- नया इनकम टैक्स बिल (जो 1961 के कानून को रिप्लेस करेगा)
- नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल
विपक्ष: ऑपरेशन सिंदूर में पारदर्शिता कहां?
विपक्ष का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत हुए अभियानों, गिरफ्तारियों और विफलताओं की पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। खड़गे के अनुसार,“जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ और खुफिया नाकामी से यह साफ है कि सरकार के दावे जमीनी हकीकत से दूर हैं।”