हंता वायरस के कारण पश्चिम अफ्रीका के क्रूज शिप पर

सावधान! हंता वायरस ने दी दस्त, WHO ने जारी किया अलर्ट, क्या है हंता वायरस?

हंता वायरस

कोरोना के बाद अब एक और वायरस ने दुनिया में दस्तक दे दी है। पश्चिम अफ्रीका के पास एक क्रूज शिप से आई खबर ने सबको परेशानी में डाल दिया है। जहाज पर कई लोग बीमार पड़े और कुछ की मौत भी हुई है।  सवाल यही है कि क्या यह वायरस भी कोरोना की तरह तेजी से फैल सकता है? क्या छूने भर से संक्रमण हो जाएगा और क्या दुनिया फिर किसी नई महामारी की तरफ बढ़ रही है? इन तमाम सवालों के बीच WHO ने अलर्ट जारी करते हुए स्थिति को लेकर बड़ी जानकारी दी। पहले ये जान लिजीए की आखिर ये वायरस है क्या और आया कहा से?

चूहों से फैसने वाला वायरस

इस वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की हंतान नदी के नाम पर पड़ा। सबसे पहले इस इलाके में 1978 में रहस्यमयी बिमारी के मामलों के बाद वैज्ञानिकों ने वायरस की पहचान की थी। बाद में पता चला कि यह संक्रमण मुख्य रूप से चूहों से इंसानों में फैलता है। हंता वायरस संक्रमित चूहों के मल-मुत्र और लार के जरिए फैलता है। कई बार सूखे मल या पेशाब के बेहद छोटे कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। यही संक्रमण का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। पुराने बंद मकान, गोदाम, खेत, लकड़ी के ढेर और गंदे स्टोर रूम ज्यादा जोखिम वाले स्थान माने जाते हैं। 

इंसान से इंसान में नहीं फैलता

WHO के मुताबिक, अगर कोई इंसान चूहों के मल-मूत्र या उसके लार के संपर्क में आने के बाद अपने चेहरे को छूता है तो हंता से संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य तौर पर हंता वायरस इंसान से इंसान में नहीं फैलता। 

3 की मौत

हाल में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अधिकारियों के मुताबिक जहाज पर पहला इंफेक्टेड व्यक्ति 6 अप्रैल को बीमार पड़ा था और 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई. शुरुआत में डॉक्टरों को हंता वायरस का शक नहीं हुआ क्योंकि उसके लक्षण सामान्य सांस संबंधी इंफेक्शन जैसे थे. इसी वजह से शुरुआती सैंपल भी नहीं लिए गए. बाद में जब दूसरे यात्री भी बीमार पड़ने लगे, तब स्वास्थ्य एजेंसियों ने हंता वायरस की जांच शुरू की. 

शुरुआती लक्षण क्या हैं?

हंता वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे होते हैं। संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, शरीर दर्द, खासकर जांघ, कमर और पीठ की मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। कई मरीजों में सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसे लक्षण भी देखे जाते है। संक्रमण के 4 से 10 दिन बाद मरीज को खांसी और सांस लेने में गंभीर दिक्कत शुरू हो सकती है। फेफड़ों में पानी भरने जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे हालत तेजी से बिगड़ सकती है। गंभीर मामलों में वायरस फेफड़ों, दिल और किडनी को प्रभावित करता है। 

क्या है इलाज?

फिलहाल हंता वायरस की कोई वैक्सीन या दवा नहीं है। डॉक्टर मरीज को लक्षणों के अनुसार इलाज देते हैं। वक्त पर अस्पताल पहुंचने और ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने से जान बचने की उम्मीद बढ़ जाती है। कुछ मामलों में एंटीवायरल दवा का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यह हर प्रकार के संक्रमण में असरदार साबित नहीं हुई है।

कैसे करे बचाव?

विशेषज्ञों का कहना है कि हंता वायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका चूहों से दूरी बनाए रखाना। घर और आसपास सफाई रखें, दीवारों और दरवाजों के छेद बंद करें, खाने-पीने की चीजें खुली न छोड़ें और लंबे समय से बंद कमरों की सफाई करते समय मास्क जरूर पहनें। चूहों के मल या पेशाब को सीधे हाथ से छूने से भी बचना चाहिए। 

भारत में खतरा नहीं

भारत में हंता वायरस के मामले बेहद कम सामने आते हैं। घबराने की जरूरत नहीं है। तमिलनाडु के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज को डॉक्टर सारा चांडी के नेतृत्व में इस वायरस के मामलों पर स्टडी हुई। इस दौरान भारत में सालों पहले कुछ मामले मिले हैं लेकिन यह बहुत दुर्लभ है। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को चूहों के संपर्क के बाद तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी हो तो जांच करानी चाहिए।  

12 देशों को अलर्ट

WHO ने यह भी बताया कि हंता वायरस की इन्क्यूबेशन अवधि 6 हफ्ते तक हो सकती है. यानी इंफेक्शन होने के कई हफ्तों बाद भी लक्षण सामने आ सकते हैं। इसी कारण दुनिया के कई देशों में यात्रियों की निगरानी रखी  जा रही है।  WHO ने उन 12 देशों को अलर्ट भेजा, जहां के यात्री सेंट हेलेना में जहाज से उतरे। हंता वायरस के आने से दुनियाभर में चिंता बढ़ गई है। हेल्थ ओर्गनािजेशन ने लोगों से अलर्ट रहने की अपील की है। फिलहाल भारत में इसका कोई खतरा नहीं है फिर भी सावधान रहना जरूरी है।