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भागवत बोले-धर्म ही मुझे और मोदी को चला रहा: जब तक धर्म रहेगा, भारत रहेगा विश्वगुरु

RSS प्रमुख मोहन भागवत बड़ी बातें: धर्म ही दुनिया का चालक है

RSS प्रमुख मोहन भागवत बड़ी बातें: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित RSS के शताब्दी वर्ष की जनसभा में कहा कि धर्म ही मुझे और नरेंद्र मोदी को चला रहा है  भागवत ने स्पष्ट किया कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह ब्रह्मांड के संचालन का नियम है। सृष्टि के अस्तित्व से लेकर प्रकृति की हर क्रिया तक, सब कुछ उसी नियम पर चलता है ।

उनका कहना था कि जिस तरह भारत ने हमेशा अपने संतों और ऋषियों से मार्गदर्शन लिया है. अगर आगे भी धर्म उसी तरह देश को चलाता रहेगा, तो भारत हमेशा विश्वगुरु बना रहेगा ।

भागवत की स्पीच की 5 बड़ी बातें

  1. धर्म का मूल सिद्धांत: सृष्टि के बनने के बाद उसके संचालन के नियम ही धर्म बन गए। संसार उसी सिद्धांत के अनुसार चलता है. दुनिया में आध्यात्मिकता की कमी के कारण कहीं ऐसा ज्ञान नहीं मिलता ।

  2. धर्म केवल पूजा नहीं: प्रकृति की हर चीज का अपना कर्तव्य और अनुशासन है. कोई राज्य धर्मनिरपेक्ष हो सकता है, लेकिन कोई व्यक्ति या रचना धर्म के बिना नहीं चल सकती ।

  3. जातिगत भेदभाव: जाति केवल काम और पेशे से जुड़ी थी. लेकिन समय के साथ यह भेदभाव का कारण बन गई। इसे मिटाने के लिए मन से जाति को समाप्त करना होगा ।

  4. RSS का उद्देश्य: संघ समाज के साथ मिलकर भारत को सर्वोच्च गौरव तक पहुंचाना चाहता है. संघ व्यक्ति के चरित्र निर्माण के जरिए राष्ट्र निर्माण करता है ।

  5. संघ का स्वरूप: संघ किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं करता, न ही प्रतिक्रिया में बना संगठन है. संघ खुद बड़ा नहीं बनना चाहता, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाना चाहता है. समझना है तो शाखाओं में शामिल होकर अनुभव करना होगा ।

भागवत के पिछले 3 बड़े बयान

  1. 17 जनवरी: इंटरनेशनल ट्रेड दबाव में नहीं होगा। भारत आत्मनिर्भरता के रास्ते पर।

  2. 11 जनवरी: RSS बदला नहीं है, समय के साथ स्वरूप सामने आया।

  3. 21 दिसंबर: संघ को BJP के चश्मे से देखना गलत है; समझना हो तो अनुभव करना पड़ेगा।

समाज और परिवार पर भी संदेश

भागवत ने लिव-इन रिलेशन और परिवार की अहमियत पर भी कहा कि लोग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं. परिवार केवल शारीरिक संतुष्टि का माध्यम नहीं. बल्कि समाज में व्यक्ति के मूल्य और सीखने की जगह है ।