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हर पंडाल को मिलेगी ‘सोने की चमक’: ₹1.10 लाख का तोहफा दे रहीं ममता!
दुर्गा पंडालों के लिए ₹500 करोड़ बांट रहीं ममता: 7 साल में मदद 11 गुना बढ़ाई
पंडाल बन गए परिवार का हिस्सा
2018 में यह सब कुछ बहुत ही नरम शुरुआत थी ₹10,000 का अनुदान, 28,000 पंडाल, और उत्सव से कुछ प्यार। लेकिन अब वक्त बदल चुका है 45,000 पंडाल, हर घर गली में उजाला; और हर पंडाल को ₹1.10 लाख का सांत्वना। साल दर साल, ₹10,000 से ₹25,000, फिर ₹50,000, ₹75,000 और ₹85,000 तक अब बिजली की लाईटों और रंग बिरंगे सजावट की चकाचौंध में ये बढ़ोत्तरी कोई चमत्कार नहीं, बल्कि इज्जत और समझ है। जब हम कहते हैं कि 7 साल में 11 गुना मदद बढ़ी, तो मैं सिर्फ दसों ख़बर नहीं, वो मेहनत सहेजे चेहरे याद करती हूँ, जो रात दिन अपनी पूजा की तैयारी में रहते हैं।त्योहार अर्थव्यवस्था की धड़कन बन जाए
एक सवाल जिसने स्थानीय कुम्हार से ले कर डिजाइनर तक सबको बात करने पर मजबूर कर दिया क्या ₹500 करोड़ केवल खर्च है, या Bengal की नबरत्न धड़कनों में निवेश? इस 10 दिन की पूजा में जो 1 लाख करोड़ तक का कारोबार उठ सकता था, उसे देखा जाए, तो ₹500 करोड़ केवल सांस्कृतिक ऊर्जा का ईंधन है। हम जो सजावट, श्रमिक, पूजन सामग्री की बढ़ती लागत (60% ऊपर) सुनते रहे वह सब हमारी इज्जत के दाम हैं। हर दीप, हर बाँसुरी, हर रंग जो जिए गाँवों की आत्मा उसका समर्थन है यह अनुदान।राज्य में 45 हजार पंडाल
मेरा पड़ोसी काशी… उड़ेरे बाज़ार है वो। कहते हैं, पहले पूजा का इंतज़ाम भी आपको 85,000 रुपये में मज़बूर था। इस बार मैं सजावट में आराम से लगाऊँगा परिवार को दिखाने लायक पूजा। यही असली असर है घरों में फैलने वाला गौरव। और फिर, जब ममता कहती हैसरकार आपके साथ है, पूजा मात्र धार्मिक उत्सव नहीं, ये सामुदायिक जीवन का हिस्सा है।