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कुलगाम में जंगलों में गोलियों की गूंज: एक और आतंकी ढेर, ऑपरेशन जारी!

कुलगाम एनकाउंटर: एक और आतंकी ढेर, सेना का ऑपरेशन जारी

कुलगाम के अखल जंगल में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया। 6 दिन में तीसरा एनकाउंटर, CRPF-सेना का संयुक्त ऑपरेशन अभी जारी है।

 सिर्फ खबर नहीं, कश्मीर की हकीकत है

शनिवार की सुबह जब देश के ज़्यादातर लोग अपने वीकेंड की चाय की चुस्कियों में खोए थे, कश्मीर के कुलगाम ज़िले में जंगलों के बीच एक और मुठभेड़ जारी थी। धुएं और बारूद की गंध के बीच, जिंदगी और मौत का खेल खेला जा रहा था। यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं यह हमारी ज़मीन पर चल रही एक सच्चाई है, जिसमें एक और आतंकवादी मारा गया। उसका नाम था हारिस नजीर डार, पुलवामा का रहने वाला, जिसने एक खतरनाक रास्ता चुना और आखिर में उसी में झुलस गया।

ऑपरेशन की शुरुआत: एक गुप्त सूचना  से

अखल जंगल, कुलगाम जहां हर पेड़ चुप है, लेकिन कुछ छिपा हुआ है। गुप्त सूचना मिली कि कुछ आतंकी इलाके में छिपे हुए हैं। बस फिर क्या था सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, CRPF और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने मोर्चा संभाल लिया। सुबह-सुबह जंगल की खामोशी में गोलियों की आवाज़ गूंज उठी। एक आतंकवादी ढेर हुआ, और उसके पास से AK-47, मैगजीन, ग्रेनेड और गोला-बारूद बरामद किया गया।

6 दिन में तीसरा एनकाउंटर

28 जुलाई: पहलगाम के जंगलों में 3 पाकिस्तानी आतंकी मारे गए सुलेमान, अफगान और जिब्रान। 31 जुलाई: पुंछ में LoC के पास 2 आतंकी ढेर। और अब 2 अगस्त कुलगाम। यह एक सीधा संकेत है  घुसपैठ और आतंकी गतिविधियां एक बार फिर तेज़ हो रही हैं। और सवाल सिर्फ ये नहीं कि आतंकवादी कहां से आ रहे हैं, बल्कि ये भी कि क्यों आ रहे हैं? कौन उन्हें भेज रहा है? और क्या हम सिर्फ जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं या इस कहानी की जड़ तक पहुँचने की कोशिश भी हो रही है?

 PAFF का नाम फिर सामने आया

सूत्रों के मुताबिक, जंगल में छिपे आतंकी PAFF (People’s Anti-Fascist Front) संगठन से जुड़े हो सकते हैं ये वही संगठन है जो कई बार पाकिस्तानी एजेंसियों के प्रॉक्सी के तौर पर सामने आया है। इस ऑपरेशन में एक और बात गौर करने लायक है सेना अब रिएक्ट नहीं कर रही, बल्कि प्रोएक्टिव हो गई है।

3 महीने की ट्रैकिंग, पहचान, और फिर एनकाउंटर

 गृह मंत्री अमित शाह ने कहा
"पाकिस्तानी वोटर ID और चॉकलेट से आतंकियों की पहचान की गई। ये कोई सामान्य खोज नहीं, एक गहरी रणनीति है।"

लोगों की क्या राय है

श्रीनगर में रहने वाले एक रिटायर्ड स्कूल टीचर गुलाम मोहम्मद कहते हैं:
"हमने बहुत खून देखा है। अब हर गोली हमें डराती नहीं, बस एक सवाल छोड़ जाती है ये कब रुकेगा?"
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