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सरकार घर चुन-चुनकर नहीं दे सकती: केजरीवाल के बंगले पर हाईकोर्ट की फटकार
सरकार बंगला 'पसंद' के हिसाब से नहीं बांट सकती: कोर्ट
क्या है पूरा मामला?
अरविंद केजरीवाल ने 17 सितंबर 2024 को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद उन्होंने 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित अपना सरकारी आवास भी खाली कर दिया। जाते वक्त वो अपनी पत्नी, माता-पिता और बच्चों के साथ कार में रवाना हुए। आखिरी दृश्य भावुक थाकेजरीवाल ने कर्मचारियों को गले लगाया, उनकी पत्नी ने बंगले की चाबी सरकारी अधिकारी को सौंपी। इसके बाद से केजरीवाल मंडी हाउस के पास एक पार्टी सांसद के सरकारी आवास में अस्थायी रूप से रह रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक पूर्व मुख्यमंत्री, और एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के नाते उन्हें बिना देरी के आवास नहीं मिलना चाहिए?कोर्ट का सवाल- सरकार कौन सा बंगला किसे देगी, ये चुनकर तय नहीं हो सकता
मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र को फटकारते हुए कहा
यह कोई ‘फ्री फॉर ऑल’ सिस्टम नहीं है। सरकार यह तय नहीं कर सकती कि किसे घर मिलेगा, किसे नहीं।जस्टिस सचिन दत्ता ने केंद्र के जवाबों को टालमटोल बताते हुए कहा कि आपने एक तरफ समय मांगा, और दूसरी ओर 35, लोधी एस्टेट वाला बंगला किसी और को दे दिया। AAP ने कोर्ट में बताया कि इस बंगले को बसपा सुप्रीमो मायावती के खाली करने के बाद केंद्र से अनुरोध किया गया था कि इसे केजरीवाल को आवंटित किया जाए। लेकिन ASG बार-बार निर्देशों की "प्रतीक्षा में होने" का बहाना बनाते रहे।
राजनीतिक पूर्वाग्रह?
AAP के वकील राहुल मेहरा ने कोर्ट में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर मामले को लटका रही है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल को जानबूझकर वंचित किया जा रहा है, जबकि वह एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष हैं और दिल्ली में उनका कोई निजी मकान नहीं है।कुछ अहम तारीखें जो इस बहस को समझने में मदद करेंगी
- ?️ 13 सितंबर 2024: केजरीवाल को तिहाड़ से जमानत मिली (ED केस में गिरफ्तारी के 177 दिन बाद)।
- ?️ 17 सितंबर 2024: CM पद से इस्तीफा।
- ?️ 4 अक्टूबर 2024: उन्होंने अपना मुख्यमंत्री आवास खाली कर दिया।
- ?️ 20 फरवरी 2025: दिल्ली चुनाव में AAP हारी, बीजेपी की सरकार बनी।
- ?️ सितंबर 2025: अब तक उन्हें कोई स्थायी आवास आवंटित नहीं हुआ।