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भारत-अमेरिका ट्रेड पर जयशंकर बोले: 'कट्टी नहीं, बातचीत जारी'

 रूसी तेल पर जयशंकर बोले- 'जो नहीं लेना चाहते, न लें'

 भारत-अमेरिका संबंध: 'कट्टी नहीं, बातचीत जारी'

नई दिल्ली में आयोजित इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका के व्यापार संबंधों पर स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच कोई "कट्टी" (झगड़ा) नहीं हुआ है और व्यापार पर बातचीत अभी भी जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार अपने किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले ले रही है और किसी प्रकार की व्यापारिक दरार की संभावना नहीं है।

रूसी तेल खरीद पर जयशंकर की स्पष्टता

रूसी तेल खरीद के संदर्भ में जयशंकर ने कहा, "भारत अपने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए ही फैसले लेता है। यदि किसी देश को भारत से तेल खरीदने में समस्या है, तो वह इसे न खरीदे। हम किसी भी देश को इसके लिए मजबूर नहीं कर रहे।" यह बयान ट्रम्प प्रशासन के आरोपों के बाद आया है, जिसमें रूस से सस्ता तेल खरीदने और उसे महंगे दामों पर बेचने के कारण भारत पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाया गया था। जयशंकर ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से काम करेगा, और जो देश रूस से तेल खरीदने में असहमत हैं, उन्हें कोई दबाव नहीं डाला जाएगा।

पाकिस्तान के मुद्दे पर मध्यस्थता का विरोध

जयशंकर ने भारत-पाकिस्तान संबंधों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा, "जब कोई संघर्ष होता है, तो देशों के बीच बातचीत होती है। अमेरिका और अन्य देशों ने भारत-पाक संघर्ष पर फोन किए थे, लेकिन भारत हमेशा इससे असहमत रहा है।" उन्होंने कहा कि यह दावा करना कि अमेरिका या किसी अन्य देश के प्रयासों से भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ, गलत है। भारत ने कभी भी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है।

अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर जयशंकर की टिप्पणियां

जयशंकर ने यह भी कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने पुराने रिश्तों को भूल रहा है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर ओसामा बिन लादेन की गिरफ्तारी का जिक्र किया, जो 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपा हुआ पाया गया था। जयशंकर ने बताया कि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों का इतिहास विवादों से भरा रहा है, जिसे कुछ देश राजनीतिक फायदे के लिए नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।

ट्रम्प की विदेश नीति पर प्रतिक्रिया

जयशंकर ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति पर भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि ट्रम्प ने विदेश नीति को एक अलग तरीके से चलाया, जो केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरी दुनिया के लिए था। यह बदलाव एक रूढ़िवादी दृष्टिकोण से बिल्कुल अलग था।

रूसी तेल खरीद पर अतिरिक्त टैरिफ

अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है, जो 27 अगस्त 2025 से लागू होगा। इससे भारत में अमेरिकी सामान पर 50% तक का टैरिफ लग सकता है, जो भारत-अमेरिका व्यापार में नया विवाद खड़ा कर सकता है।

भारत, रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार

भारत चीन के बाद रूस से तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से केवल 0.2% (68 हजार बैरल प्रतिदिन) तेल इम्पोर्ट करता था, लेकिन मई 2023 तक यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल प्रतिदिन) हो गया। भारत हर साल 130 अरब डॉलर (11.33 लाख करोड़ रुपए) से अधिक का रूसी तेल खरीद रहा है।

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