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जयपुर: हाईवे पर 300 सिलेंडर फटे, टैंकर में लगी आग और जिंदा जला ड्राइवर

 जयपुर हाईवे पर आग का तूफान:  केमिकल टैंकर की टक्कर से Inferno!

jaipur highway blast: कभी आपने 200 से ज्यादा सिलेंडरों को एक के बाद एक फटते सुना है? जयपुर-अजमेर हाईवे पर बीती रात कुछ ऐसा हुआ, जिसे सिर्फ हादसा नहीं, आग का तूफान कहा जा सकता है। Read More:- क्या सच में हम अकेले हैं: आपकी ज़िन्दगी में भी है अकेलापन का दर्द रात 10 बजे, दूदू के पास मोखमपुरा गांव के पास हाईवे किनारे खड़े LPG सिलेंडर से भरे ट्रक में एक तेज रफ्तार केमिकल टैंकर ने सीधी टक्कर मार दी। और फिर जो हुआ, वो कई किलोमीटर तक लोगों के रूह कंपा गया।

एक के बाद एक 200 धमाके, 10 किमी दूर तक गूंज

जिस ट्रक में आग लगी थी, उसमें 330 सिलेंडर थे। 200 से ज्यादा सिलेंडर ऐसे फटे कि उनके टुकड़े 500 मीटर दूर खेतों में जाकर गिरे। ढाबे के अंदर बैठे लोगों के पास तक सिलेंडर जा पहुंचे।2 घंटे तक धमाके रुक-रुककर चलते रहे, जैसे कोई जंग का मैदान हो। 10 किलोमीटर दूर तक लोगों ने धमाकों की आवाज़ सुनी।

जिंदा जल गया ड्राइवर, परिवार में छा गया मातम

केमिकल टैंकर चला रहे रामराज मीणा (35) आग की चपेट में आ गए। बचने की बहुत कोशिश की, लेकिन रफ्तार से फैली आग ने उन्हें घेर लिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। रामराज दो बच्चों के पिता थे, परिवार टोंक के देवली में रहता है। भाई बाबूलाल मीणा ने बताया
 वो घर का इकलौता कमाने वाला था। अब तो सब कुछ बिखर गया।

12 दमकलें, 3 घंटे की जंग, तब जाकर बुझी आग

दमकल की 12 गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। तीन घंटे तक आग बुझाने की कोशिश चली। लेकिन सिलेंडर में लगी आग, बार-बार धमाके और चारों ओर फैले ज्वलनशील केमिकल ने हालात बेकाबू कर दिए।5 गाड़ियां पूरी तरह जल गईं। हाईवे पर खड़ा ट्रक, ढाबे के आसपास के वाहन और सारा इलाका जलता रहा।

RTO से बचने की कोशिश ने ली जान

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, RTO की गाड़ी को देखकर टैंकर ड्राइवर ने ढाबे की ओर टैंकर घुमा दिया। शायद चालान से बचना चाहता था। लेकिन उसी वक्त सामने खड़े सिलेंडर ट्रक से भिड़ गया। और फिर... एक स्पार्क ने पूरी आग की कहानी लिख दी।

हाईवे हुआ बंद, रास्ते बदले

ट्रैफिक को तुरंत डायवर्ट किया गया। जयपुर से अजमेर की ओर जा रही गाड़ियों को टोंक रोड से और अजमेर से जयपुर आने वालों को किशनगढ़ के जरिए भेजा गया। सुबह 4:30 बजे हाईवे को फिर से खोला गया।

 ये सिर्फ हादसा नहीं था, एक सिस्टम की लापरवाही भी थी

इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडर ले जा रहे ट्रक को खुले में क्यों खड़ा किया गया? क्या केमिकल टैंकरों की चेकिंग और मॉनिटरिंग पर्याप्त है? अगर RTO को देखकर टैंकर ढाबे की तरफ घुमा, तो डर की वजह क्या थी? ये सवाल हर उस शख्स के दिमाग में हैं जिसने वो धमाके सुने, और जिन्होंने इस हादसे में अपनों को खोया। Read More:- मोबिक्विक के एप अपडेट: सिक्योरिटी चूक से रातों-रात लखपति बने लोग