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पुरी रथ यात्रा में बड़ा बदलाव: अब आम लोग नहीं चढ़ पाएंगे रथ पर, मोबाइल भी बैन!
jagannath rath yatra 2025 new rules: अब सिर्फ सेवक ही रथ पर चढ़ सकेंगे, जानिए नए नियम और सुरक्षा इंतजाम ?
jagannath rath yatra 2025 new rules : पुरी की प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 को लेकर इस बार ओडिशा सरकार ने बेहद सख्त नियम लागू किए हैं। सुरक्षा और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए इस बार रथ पर केवल नामित सेवकों को चढ़ने की अनुमति दी गई है। यदि कोई आम व्यक्ति रथ पर चढ़ता पाया गया, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने रविवार को इस संबंध में स्पष्ट जानकारी दी। इसके अलावा, रथ पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। सेवक भी मोबाइल लेकर रथ पर नहीं जा सकेंगे।? अनुशासन के लिए नामित सेवकों की सूची अनिवार्य
सरकार ने रथ यात्रा में शामिल होने वाले सभी सेवकों की सूची मांगी है। ये सूची मंदिर प्रशासन के पास जमा कराई जाएगी ताकि किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को रथ पर चढ़ने से रोका जा सके।? AI CCTV कैमरे, ड्रोन और कंट्रोल रूम से होगी निगरानी
पुरी में इस बार रथ यात्रा को सुरक्षित और हाई-टेक बनाने के लिए कई आधुनिक कदम उठाए गए हैं:- AI-इनेबल्ड CCTV कैमरे सभी प्रमुख रास्तों, चौक और मंदिर मार्गों पर लगाए जा रहे हैं।
- एक इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा जिससे भीड़ और ट्रैफिक की रियल टाइम निगरानी की जा सके।
- ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पुरी में तैनात किए जाएंगे ताकि हवाई सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
- सुरक्षा बलों में CISF, RAF और स्पेशल एजेंसियां तैनात रहेंगी।
? रथ निर्माण का काम अंतिम चरण में, मुख्य सचिव ने लिया जायजा
राज्य के मुख्य सचिव मनोज आहूजा ने रविवार को पुरी पहुंचकर रथ निर्माण कार्य की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि रथ निर्माण तय समय पर पूरा हो जाएगा और कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।? रथ बनाने वाले 'भोई' कारीगरों की सख्त दिनचर्या
जगन्नाथ रथ यात्रा में जिन सैकड़ों कारीगरों द्वारा रथों का निर्माण किया जाता है, उन्हें 'भोई' कहा जाता है। ये कारीगर:- दिन में केवल एक बार सादा भोजन करते हैं
- प्याज-लहसुन से परहेज रखते हैं
- 12 से 14 घंटे तक कड़ी धूप में काम करते हैं
- कार्य पूरा होने तक सख्त अनुशासन का पालन करते हैं
? क्या है रथ यात्रा की परंपरा?
पुरी की रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियों को रथों में बैठाकर उनकी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर ले जाया जाता है। ये यात्रा भक्ति, परंपरा और समर्पण का अद्भुत संगम होती है। लाखों श्रद्धालु हर साल इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनते हैं।? नए नियम क्यों ज़रूरी हैं?
- भीड़ नियंत्रण और भगदड़ रोकने के लिए
- रथ पर चढ़ने की होड़ से हादसों का खतरा
- साइबर और ड्रोन सुरक्षा की चिंता
- अनुशासनहीनता से परंपरा को ठेस न पहुंचे