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ट्रंप के दौर में टूटता 'अमेरिकन ड्रीम': भारतीय छात्रों को हर दिन डिपोर्ट का डर
indian students deportation 2025: अमेरिका में भारतीय छात्र पासपोर्ट लेकर क्लास जा रहे
indian students deportation 2025: "हर दिन पासपोर्ट साथ लेकर क्लास जाना पड़ता है। सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है।" ये शब्द अमेरिका में पढ़ रहे एक भारतीय छात्र के हैं, जो उस डर को बयां करते हैं जो डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते भारतीय छात्रों के बीच गहराता जा रहा है।4.25 लाख भारतीय छात्र, लेकिन अब असुरक्षित
अमेरिका की यूनिवर्सिटीज़ में इस समय लगभग 4.25 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं, जो कि विदेशी छात्रों में सबसे बड़ी संख्या है। लेकिन वीज़ा नियमों की सख्ती, ICE (Immigration and Customs Enforcement) की छापेमारी और सोशल मीडिया की निगरानी ने छात्रों का मानसिक संतुलन बिगाड़ दिया है।स्टूडेंट्स की आपबीती: “सपने के साथ डर भी आया”
"घर जाना छोड़ दिया, कहीं वापसी न हो पाए"
सादिक अहमद, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के छात्र ने बताया: "इस बार समर वैकेशन में भारत नहीं गया। कई विदेशी छात्रों को अमेरिका में दोबारा एंट्री नहीं मिली। अगर मैं फंसा तो डिग्री भी अधूरी रह जाएगी।""सोशल मीडिया पर चुप्पी जरूरी है"
आकाशदीप, कोलंबिया यूनिवर्सिटी के छात्र का कहना है: "कुछ छात्रों को ICE ने इसलिए उठा लिया क्योंकि उन्होंने एक पोस्ट को लाइक किया था। अब हम सोशल मीडिया साइलेंस में जी रहे हैं।""जॉब छोड़नी पड़ी, अब घरवाले अकेले लोन चुका रहे"
मेघना, स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी की छात्रा: "सपने थे कि पढ़ाई के बाद यहीं नौकरी करूंगी। पर अब डर लगता है कि कोई नस्लीय टिप्पणी या शिकायत कर दे। जॉब छोड़ दी है, स्ट्रेस में पढ़ाई भी नहीं हो पा रही।"कुछ छात्र अब भी आशान्वित
अखिल कुमार (टैक्सस यूनिवर्सिटी): "यह सिर्फ एक दौर है, जो निकल जाएगा। जो छात्र नियम मानते हैं उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। वीसा नियमों की सख्ती हर देश में होती है।"वीजा और ICE रेड्स का डर?
- डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के तहत अमेरिका में वीजा स्क्रूटनी और डिपोर्टेशन कार्रवाई तेज़ हुई है।
- F1 वीज़ा पर पढ़ने वाले छात्रों के लिए जॉब और यात्रा की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है।
- ICE टीमों द्वारा हॉस्टल्स और जॉब लोकेशनों पर छापे मारे जा रहे हैं।
- सोशल मीडिया पर एक्टिविटी भी अब निगरानी में है, और किसी भी पोस्ट को “राजनीतिक विरोध” या “आक्रामक व्यवहार” के रूप में देखा जा सकता है।