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बारिश और बाढ़: दिल्ली-हिमाचल-हरियाणा में हालात बेकाबू

एक जलती हुई चिता को डूबते देखना... ये दृश्य सिर्फ पानी की तबाही नहीं, इंसानी बेबसी की तस्वीर है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में रविवार को कुछ ऐसा हुआ, जिसने बारिश को सिर्फ मौसम नहीं, एक डरावनी त्रासदी में बदल दिया। बारिश लगातार हो रही थी। घाट पर चिता जल रही थी। लेकिन अचानक इतना पानी आया कि चिता बह जाने की नौबत आ गई। अफरा तफरी मच गई। जलती चिता को बचाने के लिए JCB मंगाई गई और मलबा डालकर बहाव मोड़ा गया। सोचिए, अंतिम संस्कार भी अब बारिश की मार से सुरक्षित नहीं।

 हिमाचल से हरियाणा तक... नदियों का रौद्र रूप

हिमाचल और उत्तराखंड में हो रही मूसलाधार बारिश का असर नीचे के राज्यों तक दिखने लगा है। हरियाणा में यमुनानगर के हथिनी कुंड बैराज से 1.78 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। नतीजा यमुना दिल्ली तक उफान पर है। पुराने रेलवे ब्रिज पर यमुना का जलस्तर 204.80 मीटर तक पहुंच गया है। दिल्ली में बाढ़ का अलर्ट जारी है। निचले इलाकों को खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं। फरीदाबाद के खेत जलमग्न हैं, और यमुना किनारे के गांव डूबने की कगार पर हैं।

मंडी में लैंडस्लाइड, कुल्लू में बादल फटा

चंडीगढ़ मनाली फोरलेन एक बार फिर मलबे से जाम हो गया है। मंडी में पहाड़ दरक गया, वहीं कुल्लू के नालों में उफान ने 15 पंचायतों को बाहरी दुनिया से काट दिया है। ये सिर्फ रास्ते बंद होने की बात नहीं है ये स्कूल बंद हैं, दवाइयां नहीं पहुंच पा रहीं, बीमार लोग फंसे हुए हैं।  

 देश के अन्य हिस्सों में क्या हालात हैं?

  • उत्तर प्रदेश के 20 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं।
  • मध्य प्रदेश के देवास, हरदा, खंडवा जैसे जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट है।
  • मुंबई में चेंबूर में लैंडस्लाइड से 3 घर गिर गए।
छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, और पंजाब हर जगह प्राकृतिक आपदा का खतरा मंडरा रहा है। 142 तीर्थयात्री उत्तराखंड के मद्महेश्वर में फंसे, रस्सियों से निकाला गया। पठानकोट और तरनतारन में रावी नदी ने गांव डुबो दिए। छत्तीसगढ़ के बस्तर में रेड अलर्ट अगले दो दिन राहत की उम्मीद नहीं।

दिल्ली में डर का माहौल

दिल्ली, जो देश की राजधानी है, वो आज पानी पानी है। हर साल यमुना खतरे के निशान से ऊपर जाती है, लेकिन इस बार तबाही का डर ज्यादा गहरा है। प्रशासन ने यमुना किनारे बसे लोगों को हटाने के आदेश दिए हैं, लेकिन जल्दी कुछ नहीं हो रहा। हर साल की तरह इस साल भी सवाल उठ रहा है क्या हमारी तैयारियां सिर्फ कागज पर हैं?

क्या ये 'नैचुरल डिजास्टर' है या हमारी लापरवाही का नतीजा?

अगर चिता तक डूब सकती है, अगर तीर्थयात्री रस्सियों के सहारे बचाए जा रहे हैं, अगर हर राज्य में बारिश से जान जाने का खतरा है, तो सवाल सिर्फ मौसम का नहीं है। सवाल हमारी प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी का है। Read More:- राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा: गयाजी में पेड़ और बसों पर चढ़े लोग Watch Now :-लैंडस्लाइड, बाढ़, सड़के बंद..बारिश का कहर