देश-विदेश
डोडा में बादल फटा: मंदिर बहा, लोग लापता, वैष्णो देवी यात्रा रोकी गई
जब पहाड़ चीखने लगे और नदियाँ बेकाबू हो गईं...
26 अगस्त की सुबह थी। जम्मू-कश्मीर का डोडा जिला, हमेशा की तरह हरियाली से भरा, शांत और पहाड़ी सौंदर्य में लिपटा हुआ था। लेकिन किसे पता था कि आज प्रकृति अपने सबसे रौद्र और विध्वंसकारी रूप में सामने आएगी?बस चंद मिनटों में सबकुछ बह गया…
स्थानीय निवासी रोहित, जो गुप्त गंगा मंदिर के पास एक छोटी दुकान चलाते थे, कांपते हुए कहते हैं –“मैंने तो सोचा था हल्की बारिश है, रोज़ की तरह। लेकिन कुछ ही पलों में मेरी दुकान, सामने का मंदिर और पड़ोस की मीना आंटी का घर बह गया। कोई कुछ कर ही नहीं पाया।”इस हादसे में अभी तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 10 से ज़्यादा घर पूरी तरह से पानी और मलबे में समा गए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन सड़कों और मौसम की हालत इतनी खराब है कि हर कदम भारी पड़ रहा है।
वैष्णो देवी यात्रा भी रोकनी पड़ी
जब धार्मिक यात्राएँ भी थम जाएँ, तो समझिए हालात कितने गंभीर हैं। कटरा से चलने वाली वैष्णो देवी यात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है, क्योंकि रास्ते में भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति ने यात्रा को जानलेवा बना दिया है।बच्चों की पढ़ाई भी थमी
भारी बारिश के चलते जम्मू-कश्मीर बोर्ड ने 10वीं और 11वीं की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। स्कूल बंद हैं। छोटे-छोटे बच्चे घरों में बंद होकर अपने माता-पिता की आंखों में डर पढ़ रहे हैं।तबाही की तस्वीरे: जब आस्था भी बाढ़ में बह गई
गुप्त गंगा मंदिर, जहां हर मंगलवार को सैकड़ों श्रद्धालु आते थे, अब सिर्फ मलबा है। चहरवा नाला – जहां पानी नहीं, अब मलबे का समंदर बह रहा है। चिनाब नदी, जिसने खतरे का निशान पार कर लिया है, और अब आसपास के गांवों को निगलने को तैयार है।पहलगाम में नदियाँ उफान पर
शेषनाग नाला, जो अब तक शांत बहता था, अब 6 फीट की ऊँचाई पार कर चुका है। पर्यटकों, ट्रैकर्स और स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे नदी-नालों से दूर रहें।कठुआ, उधमपुर, और मनाली– हर ओर आपदा
- कठुआ में रावी नदी के गेट खोलने पड़े।
- उधमपुर में घर जलमग्न हो गए।
- हिमाचल के मंडी और मनाली में ब्यास नदी और अन्य धाराएँ शहर को निगलने को तैयार हैं। एक पिकअप वैन नदी में बह गई।