देश-विदेश
चीन फिर देगा भारत को खाद, टनल मशीन और रेयर अर्थ आखिर अचानक यू टर्न क्यों?
जब दुश्मन ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया: क्या भरोसा किया जा सकता है?
लेकिन अब अचानक सब बदल गया है
18 अगस्त को भारत आए चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और NSA अजित डोभाल से मुलाकात की। उन्होंने वादा किया भारत को फिर से जरूरी सामान की सप्लाई दी जाएगी। सवाल उठता है क्या चीन अब वाकई सहयोग चाहता है या ये सिर्फ दिखावा है?तनाव से समाधान की ओर?
कोई बहुत पुरानी कहावत है "राजनीति में न दोस्त स्थायी होते हैं, न दुश्मन। भारत चीन का रिश्ता शायद इसका सबसे जीवंत उदाहरण है। 2020 की गलवान झड़प के बाद से दोनों देशों के रिश्ते बर्फ जैसे ठंडे थे। सीमा पर तनाव, LAC पर आमने सामने खड़ी सेनाएं और व्यापारिक अविश्वास। भारत ने तब कई चीनी ऐप्स बैन किए, और घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने की मुहिम तेज की। इसी बीच चीन ने जुलाई 2025 में भारत के लिए ज़रूरी मशीनों की सप्लाई पर रोक लगा दी इसमें ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण सेक्टर की बुनियादी चीज़ें थीं। इतना ही नहीं, चीन ने रेयर अर्थ मटेरियल जैसे सामरिक दृष्टि से अहम मेटल्स के एक्सपोर्ट पर भी कड़े नियम लागू कर दिए थे। इसका सीधा असर भारत की हाई टेक इंडस्ट्री पर पड़ा।चीन क्यों बदला?
इस बार चीन की लहज़ा अलग था। वांग यी ने खुले शब्दों में कहा"भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़े विकासशील देश हैं। हमें एक दूसरे का साथ देना चाहिए, ना कि विरोध।"उन्होंने फ्री ट्रेड, अंतरराष्ट्रीय स्थिरता, और आपसी सहयोग की बात की। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बदले हुए रुख की वजहें ये हो सकती हैं: SCO समिट में पीएम मोदी की मौजूदगी: गलवान के बाद पहली बार मोदी चीन जा रहे हैं। यह एक कूटनीतिक जीत मानी जा रही है, और शायद चीन इसे मैनेज करना चाहता है। अमेरिका चीन तनाव: अमेरिका और चीन के बीच टकराव बढ़ रहा है। ऐसे में भारत जैसे पड़ोसी देश से अच्छे रिश्ते रखना चीन की रणनीतिक ज़रूरत है। भारत का बढ़ता टेक और मैन्युफैक्चरिंग पावर: भारत में iPhone, EV और चिप मैन्युफैक्चरिंग तेज़ी से बढ़ रहा है। चीन को डर है कि यदि भारत विकल्प खोज लेगा, तो वो अपना सबसे बड़ा ग्राहक खो सकता है।