आज पूरी दुनिया में मनाया जा रहा मदर्स डे, जानिए कैसे हुई इस दिन की शुरुआत?
Mothers Day Special: मदर्स डे हर साल मई महिने के दूसरे संडे को मनाया जाता है। यह दिन मां को समर्पित होता है। इस दिन पूरे देश- दुनिया में मां के सम्मान में लोग इस दिन को सेलिब्रेट करते है। कोई उन्हें उपहार देता है, कोई उनके साथ घूमने जाता है, तो कोई उनके साथ वक्त बीताते हैं।
दरअसल, आज की डिजिटल दुनिया और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच हमारी मांए खो गई है। बच्चे अपनी ही दुनिया में गुम है। लेकिन मदर्स डे वो दिन है, अगर आप अपनी मां की ओर ध्यान नहीं देते। उनसे बात नहीं करते तो यही सोशल मीडिया आपको उनकी याद दिला देता है। आपको रियलाइज होता है। आपकी मां कितनी भोली, प्यारी और दुनिया की सबसे अच्छी औरत है।
आखिर कैसे शुरु हुआ मदर्स डे सेलिब्रेशन?
इस दिन की शुरुआत अमेरिका की एना जार्विस ने अपनी मां के सम्मान के रुप में की थी। फिल साल 1914 में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इस दिन को ऑफिशियल रुप से मान्यता दे दी गई, जिसके बाद से पूरी दुनिया ये दिन मनाया जाता है।
मदर्स डे की शुरुआत कब हुई?
अमेरिका की एना जार्विस ने मदर्स डे की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी मां के निधन के बाद उनके सम्मान के तौर पर एक स्पेशल दिन मनाने की पहल की। एना चाहती थीं कि सभी लोग अपनी मां के प्यार और त्याग के लिए हमेशा थैंकफुल रहें और उन्हें सम्मान दें। इसके बाद ही इस दिन की शुरुआत हुई।
अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने साल 1914 में मदर्स डे को ऑफिशियल रुप से मनाने की पुष्टि कर दीय़
मदर्स डे सिर्फ त्योहार नहीं
यह दिन मां को उपहार देने का बस नहीं है। बल्कि उनके त्याग, प्यार , परवाह को याद करते हुए, जीवनभर उसका सम्मान करने का है। मां वो होती है, जो बचपन से लेकर जब तक वो जीती है, तब तक अपने बच्चों के लिए निस्वार्थ भावना से सबकुछ करती है। उनकी खुशी के लिए हर तकलीफे सह लेती है। वो अपने बच्चों की पसंद न पसंद का ख्याल रखने के चक्कर में ये तक भूल जाती है। उन्हें क्या पसंद है। सिर्फ घरवालों की परवाह, प्रेम और उनकी खुशियो के लिए खुद को समर्पित कर देती है।
जो बच्चे बाहर रहते है उनके लिए
जब हम घर पर रहते हैं। मां हमारे पीछे-पीछे लगी रहती है खाना खा लो ये नहीं पसंद कुछ और बना देती हूं। खाना न खाने पर डांटती भी है और जबरजस्ती खाना खिला देती है। बच्चे इन सब चीजों से चिढ़ जाते हैं। लेकिन जब वो बाहर आते हैं, उन्हें कोई खाना बनाकर नहीं देता। उनसे मां कॉल पर तो पूंछ लेती खाना खाया। कई बार बिना खाए सो जाते हैं। मां से झूठ कह देते हैं, क्योकि वो यहां हमारा ख्याल रखने के लिए नहीं होती। ऐसे में हम उन्हें बहुत याद करते है।
ये कविता उनको याद करते हुए
"मां मैं जबसे इस अनजान शहर आई हूं, कोई "खाना खा ले खाना खा ले" कहकर परेशान नहीं करता...
कई बार मैं भूखी सो जाती हूं, यहां मेरा कोई तेरी तरह ध्यान नही रखता...
जब भी रूम में आती हूं, मुझको भूख सताती है तेरी याद भी आती है लेकिन तुमने कुछ खाया, मुझसे कोई ये सवाल नहीं करता.....
कहने को दोस्त बहुत है लेकिन मां, जब मैं परेशान होती हूं, छुपकर बहुत रोती हूं, कोई मेरे आंसू पोंछ सके ऐसा सच्चा यार नही रहता....
मां तेरी याद बहुत आती है, किसी से अपना दर्द बयान कर सकू, इस शहर में, ऐसा कोई इंसान नही रहता....
मां कोई खाना खा ले खाना खा ले कहकर परेशान नहीं करता... "