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ब्रह्मोस का नया अवतार, दिल्ली से सीधा इस्लामाबाद बनेगा निशाना, बढ़ाई जा रही रेंज

BrahMos Missile Extended Range: किसी भी देश के डिफेंस पावर की मजबूती को समझने के लिए मिसाइल सिस्‍टम के बारे में जानना जरूरी होता है। जिस देश के पास जितनी ताकतवर मिसाइल्‍स होती है, उसकी अटैकिंग पावर भी उतनी ही बेहतर मानी जाती है। 

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिसके पास अल्‍ट्रा मॉडर्न मिसाइल सिस्‍टम है। एक तरफ ब्रह्मोस जैसी अचूक क्रूज मिसाइल, तो दूसरी तरफ अग्नि-5 जैसी इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल, जो दुश्‍मन के घर में घुसकर उसे नेस्‍तनाबूद कर सकती है।

सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 6 एयरबेस को तबाह करने वाली भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल अब और भी ताकतवर होने जा रही है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक ब्रह्मोस की रेंज, रफ्तार और मारक क्षमता को और बेहतर किया जा रहा है। [caption id="attachment_124734" align="alignnone" width="628"] ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल[/caption]

ब्रह्मोस की रेंज बढ़ाने की तैयारी

अब तक इसकी रेंज करीब 300 किलोमीटर है, लेकिन नए वर्जन में इसे 450 km से लेकर 800 किलोमीटर तक करने पर काम किया जा रहा है। इन नई मिसाइलों के आने के बाद दिल्ली से सीधा पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को निशाना बनाया जा सकेगा। बता दे कि दिल्ली और इस्लामाबाद की हवाई दूरी 700 किलोमीटर है। वहीं, ब्रह्मोस मिसाइल का का हल्का वर्जन भी बनाया जा रहा है। ब्रह्मोस का वजन करीब ढाई टन है। खास वर्जन सुखोई MKI-30 लड़ाकू विमान के नीचे (अंडरबेली) लगाने के लिए तैयार किया गया है। इस वर्जन को प्रोजेक्ट डिजाइन बोर्ड से मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। 

BrahMos Missile Extended Range: 'दागो और भूल जाओ' 

बता दे कि ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज और घातक क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है। यह 'दागो और भूल जाओ' तकनीक पर काम करती है और मैक-3 यानी 332 मी./सेकेंड की गति से तिगुनी) की रफ्तार से टारगेट पर हमला करती है। इसकी स्पीड के कारण दुश्मन के रडार इसे समय रहते पकड़ नहीं पाते।

 ब्रह्मोस के 3 नए वर्जन पर काम तेज 

BrahMos Missile Extended Range: ब्रह्मोस एयरोस्पेस 2016 में मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) का सदस्य बना था। इस रिजीम में 35 देश शामिल हैं।  MTCR के नियमों के मुताबिक गैर-सदस्य देशों को 300 किमी से ज्यादा रेंज वाली मिसाइल तकनीक नहीं दी जा सकती, इसलिए पहले ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज सीमित थी। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस के 3 नए वर्जन पर काम तेज कर दिया गया ।