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दो वोटर कार्ड, एक नेता: बिहार की सियासत में फिर संकट

बिहार डिप्टी CM के दो वोटर ID? तेजस्वी ने उठाए सवाल

बिहार की राजनीति में एक और बवंडर खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बाद अब खुद बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा पर भी दो वोटर आईडी रखने का आरोप लग चुका है। एक सामान्य नागरिक के लिए ये एक कानूनी अपराध होता, लेकिन जब राज्य का दूसरा सबसे बड़ा पद रखने वाला व्यक्ति ही ऐसे विवाद में घिर जाए, तो सवाल सिर्फ कानून का नहीं, नैतिकता और पारदर्शिता का भी बन जाता है।

एक नाम, दो EPIC नंबर, अलग उम्र और एड्रेस क्या है सच्चाई?

दैनिक भास्कर की पड़ताल और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर किए गए रियलिटी चेक के अनुसार विजय सिन्हा के दो EPIC नंबर अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों (लखीसराय और पटना के बांकीपुर) में रजिस्टर्ड हैं। दोनों वोटर कार्ड में उम्र अलग, पिता का नाम थोड़ा बदलकर लिखा गया है एक में सिर्फ नाम, दूसरे में “स्व.” (स्वर्गीय) जोड़ा गया है। पता दोनों ID में ऐसा है जो विजय सिन्हा के 2020 के एफिडेविट से मेल नहीं खाता। क्या ये मानव त्रुटि है, या जानबूझकर किया गया दोहरा रजिस्ट्रेशन?

 तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए सुबूत

रविवार को तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और दोनों EPIC नंबर लाइव दिखाए। उनका सवाल था सीधा और तीखा:
 अगर मेरे दो EPIC नंबर पर मुझे चुनाव आयोग से नोटिस मिल सकता है, तो क्या डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को भी वही नियम लागू होंगे?”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिजली चली गई, जिस पर तेजस्वी ने चुटकी ली ये वही मुख्यमंत्री जी की बिजली फ्री है क्या? लेकिन कटाक्ष के पीछे जो बात छिपी थी, वो थी भरोसे और पारदर्शिता की मांग।

तेजस्वी बोले -मुझे स्पीड पोस्ट से नोटिस आया, डिप्टी CM को क्यों नहीं?

तेजस्वी ने बताया कि उन्हें 7 अगस्त को EC से स्पीड पोस्ट से नोटिस मिला, और उन्होंने अगले दिन जवाब भी दे दिया। अब उनका सीधा सवाल है क्या पटना और लखीसराय प्रशासन डिप्टी सीएम को नोटिस भेजेगा? क्या कानून सबके लिए एक जैसा है? उनका तर्क है कि अगर उन्होंने दो EPIC नंबर रखे होते तो मीडिया ट्रायल और गिरफ्तारी की मांगें तेज होतीं। तो फिर सत्ता पक्ष के लिए अलग मापदंड क्यों?

चुनाव आयोग की साख दांव पर

अगर दो अलग अलग विधानसभा में एक ही व्यक्ति के नाम से दो वोटर कार्ड वाकई मौजूद हैं, तो यह सिर्फ विजय सिन्हा की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की पारदर्शिता और सिस्टम की शुचिता पर भी सवाल है।
या तो कोई फर्जी है, या पूरा सिस्टम ही खामियों से भरा है।
इसमें जो भी सच हो, देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ये एक गंभीर चेतावनी है।

 जब राजनेता सिस्टम से ऊपर दिखने लगें, तो...

राजनीति में आरोप प्रत्यारोप आम हैं। लेकिन जब कानूनी नियमों की बात आती है, तो सत्ताधारी और विपक्ष दोनों को एक ही तराजू पर तौला जाना चाहिए। विजय सिन्हा पर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, और अगर दोषी पाए जाते हैं, तो कानून के तहत उचित कार्रवाई भी। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी ईमानदारी और निष्पक्षता होती है। अगर वही डगमगाने लगे, तो लोकतंत्र सिर्फ नाम का रह जाता है। Read More:- भारत पाक एयरस्पेस विवाद: पाकिस्तान को ₹127Cr का नुकसान Watch Now :-चांडिल स्टेशन पर दो मालगाड़ियों की टक्कर का LIVE video