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NSA अजीत डोभाल और पुतिन की मुलाकात: पुतिन इस साल भारत आएंगे

भारत रूस रिश्ते पर अहम चर्चा

  अजीत डोभाल ने हाल ही में मॉस्को यात्रा के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हुई। डोभाल ने भारत रूस संबंधों को बेहद खास बताया और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी पर जोर दिया।

भारत रूस रिश्ते: एक स्थिर साझेदारी

भारत और रूस के बीच सामरिक और राजनीतिक रिश्ते दशकों पुराने हैं, और डोभाल ने इस मुलाकात में इसे महत्वपूर्ण बताया। डोभाल ने कहा,
हमारा रिश्ता बहुत खास और पुराना है। हम अपनी रणनीतिक साझेदारी को बहुत महत्व देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वे राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के लिए खुश हैं और तारीखें लगभग तय हो चुकी हैं। यह बयान दोनों देशों के संबंधों में एक नई दिशा का संकेत है।

पुतिन इस साल भारत आ सकते हैं

रूसी राष्ट्रपति पुतिन इस साल के आखिरी हफ्ते में भारत दौरे पर आ सकते हैं। रूसी न्यूज एजेंसी तास के अनुसार, NSA डोभाल ने इस बात की पुष्टि की कि पुतिन की यात्रा से भारत रूस के रिश्तों में और मजबूती आएगी। यह यात्रा खासतौर पर तब महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण टैरिफ बढ़ा दिए थे।   2021 में पुतिन ने भारत का दौरा किया था, लेकिन वह सिर्फ 4 घंटे के लिए ही आए थे। उस यात्रा में दोनों देशों ने 28 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे और 2025 तक 30 अरब डॉलर का सालाना व्यापार लक्ष्य तय किया था।

क्या पुतिन की भारत यात्रा यूक्रेन युद्ध के प्रभाव को बदल सकेगी?

पुतिन की भारत यात्रा का राजनीतिक संदर्भ इस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, खासतौर पर जब यूक्रेन युद्ध के कारण पुतिन की अंतरराष्ट्रीय स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। ICC द्वारा पुतिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किए जाने के बाद से उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय दौरे सीमित कर दिए हैं। उन्होंने G20 समिट में भी हिस्सा नहीं लिया था, और अब वे ब्राजील में होने वाली आगामी G20 बैठक में भी शामिल होने से बच सकते हैं। हालांकि, भारत रूस संबंध पर इस यात्रा का प्रभाव महत्वपूर्ण होगा, खासकर दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने में।

रूसी तेल: भारत का बढ़ता आयात

भारत अब रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन चुका है। यूक्रेन युद्ध से पहले, भारत रूस से 0.2% (68,000 बैरल प्रतिदिन) तेल इम्पोर्ट करता था। अब यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल प्रतिदिन) हो गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग बहुत महत्वपूर्ण बन चुका है।

भारत और रूस के रिश्तों का भविष्य

रूस भारत व्यापार अब 100 अरब डॉलर से ऊपर जाने की दिशा में है, जो पहले सिर्फ 60 अरब डॉलर था। साथ ही, दोनों देशों ने 2030 तक के लिए एक नया आर्थिक रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और सैन्य सहयोग को प्रगति मिलने की संभावना है। PM मोदी ने 2024 में दो बार रूस का दौरा किया था और पुतिन को भारत आने का निमंत्रण दिया था। रूस ने 2023 में मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान 'ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल' से नवाजा था।

रूस के साथ मजबूत साझेदारी

भारत ने हमेशा रूस के साथ अपनी सैन्य और ऊर्जा साझेदारी को प्राथमिकता दी है, और अब दोनों देशों के रिश्ते एक नए आर्थिक और सामरिक दौर में प्रवेश कर रहे हैं। पुतिन की भारत यात्रा से यह साफ हो जाएगा कि दोनों देशों के संबंध आने वाले समय में किस दिशा में विकसित होंगे। Read More:- भारत पाक एयरस्पेस विवाद: पाकिस्तान को ₹127Cr का नुकसान Watch Now :-चांडिल स्टेशन पर दो मालगाड़ियों की टक्कर का LIVE video