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40 years of the gas Tragedy: भोपाल गैस कांड के 40 साल पूरे.. तीन पीढ़ी से जूझ रहे लोग

40 years of the gas Tragedy:  2 और 3 दिसंबर 1984 की रात बहुत डरावनी है... वो रात मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रह रहे लोगों के लिए श्राप थी,और इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया..

चारों तरफ सिर्फ मौत का तांडव था.. लोग सो रहे थे.. और वो लोग कभी उठे ही नहीं..

[caption id="attachment_119830" align="alignnone" width="300"] चारों तरफ सिर्फ मौत का तांडव[/caption] जिस शख्स पर गुजरी मानों उसपर गमों का पहाड़ टूट पड़ा.. उस रात में इतना गम था कि, मानो जैसे उस रात की सुबह ही न थी। आधी रात से सुबह तक शहर के बीचों बीच बनी कीटनाशकों का जहर बनाने वाली यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से निकली जहरीली गैस (मिथाइल आइसो साइनाइट) ने जहां एक तरफ हजारों लोगों को मौत की नींद सुला दिया...

हजारों लोगों को मौत की नींद सुला दिया

[caption id="attachment_119831" align="alignnone" width="300"] मौत की नींद[/caption] वहीं, दूसरी तरफ जिन लोगों की जान बच गई, वो आज भी इस घटना के बाद बिमारी से जुझ रहे है... या उनकी नस्लें आज भी किसी न किसी बीमारी से जूझकर तिल-तिल मर रहे हैं...

पीड़ित की तीसरी पीढ़ी पर भी असर

बता दें की साल 2025 में गैस कांड को 41 साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन उस घातक कैमिकल का असर गैस पीड़ित की तीसरी पीढ़ी पर भी किसी न किसी रूप में रहेगा...

घटना में मरने वालों की संख्या हजारों में थी

[caption id="attachment_119832" align="alignnone" width="300"] संख्या हजारों में थी[/caption] जानकारी के अनुसार इतिहास की अब तक की ये इस सबसे बड़ी दुर्घटना है.. जिसमें मारे जाने वालों की गणना में तो मदभेद हो सकता है.. लेकिन ये त्रासदी कितनी गंभीर थी, इसपर सभी एकमत हैं.. इस घटना में मरने वालों की संख्या हजारों में थी..

कई संस्थाए मदद भी कर रही

[caption id="attachment_119833" align="alignnone" width="300"] कैंसर या टीबी इनमें प्रमुख[/caption] इस घटना के बाद कई बिमारी जैसे किडनी फेलियर, कैंसर या टीबी इनमें प्रमुख हैं.. स्वास्थ विभाग ने शहर के गैस पीड़ितों के लिए विशेषरूप से कैंसर और टीबी अस्पताल में अलग से व्यवस्था कर रखी है.. और कई संस्थाए मदद भी कर रही है..

जिंदगी की आखरी रात

[caption id="attachment_119834" align="alignnone" width="300"] आखरी रात[/caption] 40 years of the gas Tragedy: उस रात सोने वालों के लिए कभी सुबह हुई ही नहीं.. लोग आधी रात में भाग भाग कर अपनी जान बचा रहे थे.. अपनों की जान बचा रहे थे.. लेकिन उन्हे क्या पता था की ये उनकी जिंदगी की आखरी रात है..

तिल-तिल कर जान गवा रहे लोग

[caption id="attachment_119835" align="alignnone" width="300"] जान गवा रहे लोग[/caption] लोगों को कहना है की उस रात उनकी आंखों में भयंकर जलन थी और सांस भी नहीं ली जा रही थी. जिन लोगों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा उनकी जान तभी चली गई थी और जिनपर इसका थोड़ा कम प्रभाव पड़ा वो अब तिल-तिल कर जान गवा रहे हैं.

मौत को लेकर कोई फिक्स दावां नहीं है

सरकारी आंकड़ों की माने तो इस दुर्घटना के कुछ ही घंटों के भीतर 3 हजार लोग मारे गए थे... हालांकि, कई लोगों को कहना है की ये संख्या करीब 3 गुना ज्यादा थी। इतना ही नहीं, कुछ लोगों का तो ये भी दावा है कि, गैस के कारण तुरंत मरने वालों की संख्या 15 हजार से भी अधिक थी... और मौतों का सिलसिला सिर्फ उस रात से शुरु होकर उसी रात को खत्म नहीं हुआ, ये तब से लेकर अब तक जारी है.. ये गैस इतनी घातक है कि, पीड़ित की 3 पीड़ियों तक इसका असर रहेगा.

कुछ ही घंटों में हवा में मिला था 40 टन जहर

[caption id="attachment_119836" align="alignnone" width="300"] 40 टन जहर[/caption] जानकारों की मानें तो 3 दिसंबर की रात 12 बजें से यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से रिसना शुरु हुई जहरीली गैस से सुबह वॉल बंद किए जाने तक करीब 40 टन गैस का रिसाव हो चुका था.. और इसका कारण ये था कि, फैक्टरी के टैंक नंबर 610 में जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस से पानी मिल गया था.. और टैंक खुल गया, जिसके चलते वो जहरीली गैस वायु मंडल में फैल गई.. और लोगों की मौत का कारण बन गई..

क्या हुआ था उस रात

भोपाल गैस त्रासदी का मुख्य कारण यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक संयंत्र से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव था.. इसके पीछे कई तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी लापरवाही, जैसे कि रखरखाव में कमी और सुरक्षा नियमों का पालन न करना जिम्मेदार थे...

सुरक्षा उपायों का अभाव

[caption id="attachment_119837" align="alignnone" width="300"] सुरक्षा उपायों का अभाव[/caption]
संयंत्र में MIC खतरनाक रसायन को संग्रहीत करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं थे.

तकनीकी खराबी

कंक्रीट का आवरण टूटने से टैंकों में पानी भर गया, जिससे यह प्रतिक्रिया हुई और गैस का रिसाव हुआ.

रखरखाव में कमी

संयंत्र के रखरखाव में लापरवाही के कारण सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया.

खतरनाक रसायनों का भंडारण

MIC का भंडारण और संचालन जोखिम भरे तरीके से किया जा रहा था। और यही कारणों ने मिलकर एक विनाशकारी दुर्घटना को जन्म दिया, जिसके कारण 2 दिसंबर 1984 को गैस रिसाव हुआ और बड़े पैमाने पर लोगों की मौत हुई..

वहीं पीड़ित का सवाल है की कब मिलेगा मुआवजा

40 years of the gas Tragedy: भोपाल गैस कांड पर सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त मुआवजे की मांग वाली केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है, जो 1989 के समझौते का उल्लंघन होगा. हाल ही में, 22 सितंबर को एक उच्च न्यायालय में एक अहम सुनवाई हुई, जिसमें मुआवजे के मुद्दे पर चर्चा की गई और सरकार को जवाब देने का निर्देश दिया गया था..