समय रैना और अन्य कॉमेडियनों पर सुप्रीम कोर्ट ने 3

सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना को निर्देशों का पालन न करने पर फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना पर लगाया 3 लाख रुपये का जुर्माना

"इंडियाज गॉट लेटेंट" विवाद में आदेशों का पालन न करने पर फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 2026 को कॉमेडियन समय रैना सहित चार अन्य कंटेंट क्रिएटर्स पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रत्येक पर 3 लाख रुपये की लागत (कॉस्ट) लगाई। कोर्ट ने कहा कि इन सभी ने दिव्यांगजनों से जुड़ी टिप्पणियों के मामले में पहले दिए गए वचनों (अंडरटेकिंग्स) का पालन नहीं किया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद समय रैना द्वारा होस्ट किए जाने वाले ऑनलाइन टैलेंट शो "इंडियाज गॉट लेटेंट" से जुड़ा है, जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों और दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित लोगों, विशेष रूप से स्पाइनल मस्क्युलर एट्रॉफी (SMA) से ग्रसित व्यक्तियों का मज़ाक उड़ाने वाली टिप्पणियां की गई थीं। क्योर SMA इंडिया फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि इन टिप्पणियों ने SMA से पीड़ित एक व्यक्ति और उसके इलाज की भारी लागत का मज़ाक बनाया। याचिका में दिव्यांगजनों की गरिमा का उल्लंघन करने वाली ऑनलाइन सामग्री को नियंत्रित करने के लिए व्यापक नियमन की मांग भी की गई थी।

पिछले साल अगस्त 2025 में, कोर्ट ने समय रैना और चार अन्य कॉमेडियन — विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर — को सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने और सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया था। इसमें दिव्यांगजनों की उपलब्धियों को दर्शाने वाले कार्यक्रम आयोजित करना, दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए धन जुटाना, और अपने कार्यक्रमों में प्रभावित समुदायों को सीधे शामिल करना शामिल था।

14 जुलाई को क्या हुआ

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने तब गहरी नाराज़गी जताई जब कोर्ट को बताया गया कि समय रैना ने अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया है। क्योर SMA इंडिया फाउंडेशन की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि पहले के निर्देशों के बावजूद न तो फाउंडेशन और न ही उसके किसी लाभार्थी से रैना ने संपर्क किया।

पीठ ने टिप्पणी की कि रैना ने अदालत को "गुमराह" किया है और कोर्ट में दिए गए बयानों तथा वचनों का खुलेआम उल्लंघन किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह चूक तब और गंभीर हो गई जब यह दावा किया गया कि अनुपालन हलफनामा (कंप्लायंस एफिडेविट) दाखिल कर दिया गया है, जबकि वास्तव में ऐसा कोई हलफनामा दाखिल ही नहीं हुआ था।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए, ने रैना के नए शुरू हुए शो के दूसरे सीज़न की ओर भी कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें कॉमेडियन ने कार्यवाही की ओर परोक्ष रूप से इशारा करते हुए एपिसोड की शुरुआत में एक धार्मिक-सांकेतिक क्रिया (नींबू-मिर्च टांगना) की थी। मेहता ने कॉमेडियनों के हलफनामों में इस्तेमाल किए गए "दिव्यांग व्यक्ति" शब्द पर भी आपत्ति जताई और "विशेष योग्यजन" शब्द का सुझाव दिया।

न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि रैना वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करने के बजाय पैसों से मामला निपटाने की कोशिश कर रहे प्रतीत होते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने जोड़ा कि सार्वजनिक हस्तियों की समाज के प्रति अधिक ज़िम्मेदारी होती है, और सम्मान उतना ही मिलता है जितना दिया जाता है।

जुर्माने की राशि

कोर्ट ने शुरुआत में रैना पर 10 लाख रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया था, लेकिन उनके वकील की नरमी की अपील सुनने के बाद इसे घटाकर सभी पांच कॉमेडियनों पर समान रूप से 3 लाख रुपये कर दिया। सभी को दो सप्ताह के भीतर यह राशि जमा करने और उचित अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने आगाह किया कि यदि अगली सुनवाई तक अनुपालन संतोषजनक नहीं पाया गया, तो जुर्माना बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक किया जा सकता है।

व्यापक निर्देश

पीठ ने कॉमेडियनों को हर महीने कम से कम दो कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया, जिनमें दिव्यांगजनों की सफलता की कहानियां दिखाई जाएं और विशेष रूप से SMA से पीड़ित व्यक्तियों के इलाज के लिए धन जुटाया जाए। इसके अलावा, कोर्ट ने केंद्र सरकार से दिव्यांगजनों और दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों को दंडनीय अपराध बनाने वाला कानून बनाने पर विचार करने को कहा, जो अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम की तर्ज पर हो सकता है।

आगे क्या

अब दो सप्ताह की अनुपालन समय-सीमा शुरू हो चुकी है, और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या समय रैना और अन्य कॉमेडियन इस बार निर्देशों का पालन करेंगे — या फिर कोर्ट द्वारा पहले से संकेतित कठोर वित्तीय परिणामों का सामना करेंगे।