महाराष्ट्र: आदिवासी महिला से सामूहिक दुष्कर्म, नशीला पदार्थ खिलाने, वीडियो बनाकर धमकाने का आरोप; 8 के खिलाफ FIR
महाराष्ट्र के जलगांव जिले में एक विवाहित आदिवासी महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला शनिवार को सामने आया है। जामनेर तालुका के सुकनाइक टांडा क्षेत्र की रहने वाली 30 वर्षीय महिला की शिकायत पर फत्तेपुर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत सात नामजद और तीन से चार अज्ञात आरोपियों सहित कुल 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
पीड़िता कृषि मजदूर के रूप में काम करती है। उसकी शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
नशीला पदार्थ खिलाकर गन्ने के खेत में ले जाने का आरोप
एफआईआर के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसे खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर खिलाया गया, जिसके बाद उसे गन्ने के खेत में ले जाकर कथित रूप से कई लोगों ने दुष्कर्म किया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने घटना का वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर महिला को डराया-धमकाया।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसके पति ने समुदाय के लोगों और पुलिस से मदद लेने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की।
बंदूक की नोक पर यौन उत्पीड़न का भी आरोप
पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि करीब एक महीने पहले आरोपियों ने दोपहिया वाहन पर उसका कथित अपहरण किया था। 16 जुलाई 2026 को उसने हिम्मत जुटाकर फत्तेपुर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
एफआईआर के मुताबिक, एक आरोपी ने कथित तौर पर बंदूक की नोक पर महिला के साथ दुष्कर्म किया, जबकि अन्य आरोपी पहरा देते रहे। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने घटना का वीडियो बनाकर उसे सार्वजनिक करने की धमकी दी, जिससे पीड़िता भयभीत रही।
इन लोगों को बनाया गया आरोपी
पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर रामेश्वर गणपत राठौड़, सूरज भीमसिंह राठौड़, पवन छगन राठौड़ (सभी निवासी सुकनाइक टांडा) तथा भारमल कृपाल साबले (निवासी गोदरी टांडा, जामनेर तालुका) को नामजद आरोपी बनाया है। इसके अलावा तीन से चार अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उनकी पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने पुलिस पर लगाए आरोप
मामले को लेकर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि पीड़िता के पति का फोन मिलने के बाद उन्होंने संबंधित पुलिस निरीक्षक और उप पुलिस अधीक्षक (DySP) से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर उनके फोन काट दिए गए।
सामाजिक कार्यकर्ता का आरोप है कि जब वे अगले दिन पुलिस थाने पहुंचे, तो शुरुआत में उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया गया और बाद में विभिन्न कारण बताए गए।
हालांकि, उप मंडलीय पुलिस अधिकारी (SDPO) बापू रोहम ने कहा कि पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।