अमेरिका के 12.5% टैरिफ पर भारत का पलटवार! बोला- एकतरफा फैसला मंजूर नहीं
भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) से प्रस्तावित 12.5% अतिरिक्त टैरिफ पर दोबारा विचार करने की अपील की। भारत ने अमेरिका से कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों का समाधान एकतरफा फैसलों के बजाय आपसी बातचीत और द्विपक्षीय व्यापार चर्चा के जरिए किया जाना चाहिए।
जांच में कई कमियां और खामियां
भारत का कहना है कि जबरन मजदूरी से जुड़े मुद्दों पर की गई सेक्शन 301 जांच में कई कमियां और खामियां पाई गई हैं। इस मामले में आयोजित सार्वजनिक सुनवाई के दौरान कॉर्मशियल विभाग के संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने कहा कि भारत जबरन मजदूरी को खत्म करने को अपनी कानूनी और इंटरनेशनल जिम्मेदारी मानता है। भारत देश इस विषय को पूरी गंभीरता से लेता है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सिद्धांतों का सम्मान करता है।
46 देश एक ही कैटेगरी में
भारत ने USTR की ‘धारा 301’ के तहत की गई जांच पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। इस जांच में कुछ देशों पर बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात को लेकर कार्रवाई की बात कही गई। भारत का कहना है कि इस जांच में कई कानूनी खामियां हैं और रिपोर्ट पर्याप्त सबूतों पर आधारित नहीं है। भारत ने यह भी कहा कि USTR ने अपनी रिपोर्ट में भारत समेत 46 देशों को एक ही कैटेगरी में रख दिया है, जबकि हर देश की स्थितियां अलग हैं। भारत का कहना है कि रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया कि पूरे देश पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की जरूरत क्यों है।
एक्स्ट्रा शुल्क लगाने का कोई मजबूत आधार नहीं
इसके अलावा, जांच में कुछ चुनिंदा मामलों और व्यापार रुझानों के आधार पर निष्कर्ष निकाले गए। भारत का दावा है कि देश-विशिष्ट और उद्योग-विशिष्ट सबूत पेश नहीं किए गए हैं। भारत ने यह भी कहा कि USTR यह साबित नहीं कर पाया है कि भारत में आयात प्रतिबंधों की कथित कमी की वजह से अमेरिकी व्यापार को कोई अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान हुआ है। ऐसे में एक्स्ट्रा शुल्क लगाने का कोई मजबूत आधार नहीं बनता।