स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिट

भारत ने रचा स्पेस इतिहास! पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च

स्काईरूट एयरोस्पेस के 'मिशन आगमन' ने भरी उड़ान, 450 किमी की लो-अर्थ ऑर्बिट में छोटे सैटेलाइट करेगा तैनात; निजी स्पेस सेक्टर के लिए ऐतिहासिक पल

भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। हैदराबाद की निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से देश का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। 'मिशन आगमन' के तहत लॉन्च हुआ यह रॉकेट छोटे सैटेलाइट्स को पृथ्वी से करीब 450 किलोमीटर ऊंची लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करेगा।यह मिशन सिर्फ स्काईरूट के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के पूरे प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। वर्ष 2020 में स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों के लिए रास्ता खुलने के बाद किसी भारतीय निजी कंपनी का यह पहला ऑर्बिटल लॉन्च है।

क्यों खास है विक्रम-1?

स्काईरूट इससे पहले 2022 में विक्रम-एस नाम का सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कर चुकी है, लेकिन वह केवल परीक्षण मिशन था। विक्रम-1 एक ऑर्बिटल रॉकेट है, जो उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम है। यह चार चरणों वाला रॉकेट है, जिसमें पहले तीन चरण ठोस ईंधन और चौथा चरण लिक्विड फ्यूल इंजन से संचालित होता है।

प्राइवेट स्पेस सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार

स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना 2018 में इसरो के पूर्व इंजीनियर पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रम-1 की सफलता से भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग वैश्विक सैटेलाइट लॉन्च बाजार में मजबूत दावेदारी पेश करेगा और देश में कमर्शियल स्पेस मिशनों को नई गति मिलेगी।