दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर

राजेंद्र भारती को हाईकोर्ट से राहत: कपिल सिब्बल की दलील पर जल्द सुनवाई मंजूर, 26 मई को अगली तारीख

मध्य प्रदेश के दतिया से जुड़े चर्चित एफडी हेराफेरी मामले में पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। हाईकोर्ट ने उनकी ओर से दायर जल्द सुनवाई की याचिका स्वीकार कर ली है। अब मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी।

कपिल सिब्बल ने कोर्ट में रखा पक्ष

राजेंद्र भारती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत में पेश हुए। उन्होंने मामले की संवेदनशीलता और राजनीतिक प्रभाव का हवाला देते हुए जल्द सुनवाई की मांग की।बताया गया कि 4 मई को त्वरित सुनवाई के लिए आवेदन दायर किया गया था, जिसे 6 मई को कोर्ट के सामने पेश किया गया। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए 26 मई की तारीख तय कर दी।

27 साल पुराने एफडी मामले में दोषी करार

राजेंद्र भारती को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें 3 साल की सजा सुनाई थी, हालांकि बाद में जमानत भी दे दी गई।उन्हें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में दोषी माना गया है। मामले में सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी सजा सुनाई गई है।

क्या है पूरा एफडी हेराफेरी मामला?

मामले की शुरुआत वर्ष 1998 में हुई थी। राजेंद्र भारती की मां सावित्री श्याम ने दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपए की एफडी कराई थी।आरोप है कि 1998 से 2001 के बीच बैंक अध्यक्ष रहते हुए राजेंद्र भारती ने बैंक कर्मचारी के साथ मिलकर एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी। इसके बाद 1999 से 2011 तक 13.5 प्रतिशत ब्याज दर के आधार पर हर साल लगभग 1 लाख 35 हजार रुपए निकाले गए।जांच में फर्जी दस्तावेजों और अनियमितताओं की बात सामने आने के बाद मामला अदालत तक पहुंचा।

भाजपा नेता ने उठाया था मामला

यह मामला सबसे पहले भाजपा नेता पप्पू पुजारी द्वारा उठाया गया था, जो 2011 में बैंक अध्यक्ष बने थे। इसके बाद सहकारिता विभाग की जांच में एफडी पर ऑडिट आपत्ति दर्ज हुई।2015 में तत्कालीन कलेक्टर प्रकाशचंद्र जांगड़े की पहल पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया। बाद में कोर्ट के आदेश पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं में केस चलाया गया।

विधायकी पर मंडरा रहा संकट

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता समाप्त हो सकती है। राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा मिलने के बाद विधानसभा ने उनकी सदस्यता खत्म कर दतिया सीट रिक्त घोषित कर दी है।हालांकि यदि हाईकोर्ट उनकी सजा पर रोक लगा देता है, तो उनकी सदस्यता बच सकती है। इसी वजह से 26 मई की सुनवाई को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।