MP High Court: जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने अहम सुनवाई के दौरान खुद खुलासा किया कि बीजेपी विधायक संजय पाठक ने उनसे फोन पर इस केस पर चर्चा करने की कोशिश की थी। इस खुलासे के बाद जस्टिस मिश्रा ने पूरी शिद्दत से कहा कि वे इस मामले की सुनवाई में शामिल नहीं होना चाहते, और खुद को मामले से अलग कर लिया।
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MP High Court: अपने आदेश में जस्टिस मिश्रा ने लिखा:
“संजय पाठक ने इस विशेष मामले पर चर्चा के लिए मुझसे संपर्क करने प्रयास किया है, इसलिए मैं इस रिट याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं हूं। इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि इसे उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सके…
यह जनहित याचिका अवैध खनन के आरोपों से जुड़ी है, जिसमें कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में शिकायत दबंग खनन रोकने के लिए दर्ज की थी।
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MP High Court: इस याचिका के पक्षकार नहीं थे
दीक्षित का आरोप था कि संबंधित कंपनियों ने 1000 करोड़ रुपये की वसूली नहीं की। जांच टीम ने 23 अप्रैल 2025 को रिपोर्ट सौंपते हुए तीन कंपनियों पर 443 करोड़ रुपये वसूलने की सिफारिश की थी… .
इस केस में संजय पाठक द्वारा इंटरवीन आवेदन दायर किया गया, जिसमें उन्होंने माइनिंग से जुड़े व्यक्तियों की ओर से अपना पक्ष रखा था—हालांकि वे इस याचिका के पक्षकार नहीं थे।
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MP High Court: पीठ से खुद को अलग करने का निर्णय लिया
फैसले से पहले के इस हस्तक्षेप के प्रयास को जज ने "नैतिक आचरण" और "न्यायपालिका की स्वतंत्रता" को बनाए रखने की दृष्टि से आपत्तिजनक माना। इसलिए, उन्होंने पीठ से खुद को अलग करने का निर्णय लिया।
MP High Court: इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है
यह पहला मामला है जहां किसी हाईकोर्ट जज ने अदालत में ही यह स्पष्ट किया हो कि किसी विधायक की न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की कोशिश के बाद उन्होंने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। इस कदम से न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता की रक्षा के प्रति जज की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। संजय पाठक की ओर से फिलहाल इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।