भोजशाला विवाद-मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने का कोई सबूत नहीं-मुस्लिम पक्ष
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में धार की भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर चल रही सुनवाई में मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलें पेश करते हुए कहा कि वहां किसी मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाए जाने का कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है। बता दें कि वकीलों की तरफ से तर्क रखा गया कि इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि वहां किसी विशेष मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। जिसके बाद इंदौर खंडपीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी इस मामले में दायर याचिकाओं और एक रिट अपील पर सुनवाई कर रहे हैं।
जैन देवी अंबिका की प्रतिमा
मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी धार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि किसी विशिष्ट काल में मंदिर को तोड़ कर उसी स्थान पर मस्जिद बनाए जाने का कोई साक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा कि 2003 में ब्रिटिश हाई कमीशन द्वारा मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को भेजे गए 1 कथित पत्र का हवाला दिया और कहा कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस प्रतिमा को हिंदू पक्ष वाग्देवी (मां सरस्वती) की मूर्ति बता रहा है, वह वास्तव में जैन देवी अंबिका की प्रतिमा है।
सिविल मुकदमों में किया जाता
इसी के साथ खुर्शीद ने सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के फैसले का जिक्र किया। और कहा कि इस विवाद का समाधान भी स्थापित कानूनी सिद्धांतों और साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए, जैसा कि सिविल मुकदमों में किया जाता है।
पुनर्निर्माण का केंद्र रहा
उन्होंने रामसेवक गर्ग की पुस्तक हजरत मौलाना कमालुद्दीन चिश्ती (रहमतुल्लाह अलैह) का हवाला दिया और कहा कि धार जो कभी मालवा की राजधानी थी, इतिहास में कई बार हमलों, लूट और पुनर्निर्माण का केंद्र रहा है।
अगली सुनवाई सोमवार को होगी
उन्होंने यह तर्क भी दिया कि कमालुद्दीन चिश्ती से जुड़ी मस्जिद उस समय के शासक की ओर से परिसर में बनवाई गई थी, न कि किसी मंदिर को बलपूर्वक तोड़कर। अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।