Fertilizer crisis troubling farmers of Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में रबी सीजन की बोवनी लगभग पूरी होने के साथ ही खाद संकट फिर से दस्तक दे रही है. बता दें की प्रदेश में 145 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में गेहूं और चना की फसलों की सिंचाई जारी है..
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मध्य प्रदेश में रबी सीजन की बोवनी[/caption]
जिसके कारण यूरिया की मांग अचानक बढ़ गई है. और रिकॉर्ड बताते हैं कि रबी सीजन के लिए लगभग 23 लाख टन यूरिया की आवश्यकता है, लेकिन अब तक सिर्फ 16 लाख टन ही उपलब्ध हो पाया है.
इस का सीधा असर किसानों पर पड़ा है
जिसके चलते छतरपुर, टीकमगढ़, अशोकनगर, शिवपुरी, रतलाम, नीमच, मंदसौर, धार सहित कई जिलों में किसानों को रात भर लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है. किसान कहीं चक्काजाम कर रहे हैं, तो कहीं वितरण केंद्रों पर हंगामा किया जा रहा है..
जानिए सरकार के दावे कितने सच?
एक तरफ सरकार का दावा है कि खाद की कमी नहीं है और आपूर्ति आवश्यकता अनुसार की जा रही है। दूसरी तरफ किसानों को लाइन में घंटों लगना पड़ रहा है.. घंटों इंतजार करना पड़ रहा है...
Fertilizer crisis troubling farmers of Madhya Pradesh: जमीनी हालात इन दावों पर सवाल खड़े करते हैं. कई जिलों में किसानों को 2-3 दिन तक लगातार लाइन लगाने के बाद भी खाद नहीं मिल पा रही.
एक दिन पहले रात 9 बजे से ही लाइन लगा ली
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लाइन लगा ली[/caption]
वहीं रतलाम की बात करें तो वहा केंद्र के बाहर किसानों ने एक दिन पहले रात 9 बजे से ही लाइन लगा ली.
सरकार का एक दावा यह भी है कि बीते दो सालों में 7.31 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बढ़ने से यूरिया की खपत बढ़ी है, और 2026 तक यह क्षमता और बढ़ेगी.
Fertilizer crisis troubling farmers of Madhya Pradesh: किसानों का फूट पड़ा गुस्सा
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किसानों का फूट पड़ा गुस्सा[/caption]
टीकमगढ़ के किसानों ने बताया कि इस बार खाद की किल्लत ने किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। स्थिति यह है कि सुबह से लेकर देर शाम तक किसानों की लंबी-लंबी लाइनें वितरण केंद्रों के बाहर लगी रहती हैं.
लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को खाद नहीं मिल पा रही.
वहीं छिंदवाड़ा में भी 30,593 टन की भारी मांग दर्ज की गई है, जबकि धार जिले में 3,000 से 4,000 टन यूरिया की जरूरत बताई जा रही है. दूसरी ओर, खंडवा में हालात इतने खराब हैं कि..
सिर्फ एक बैग यूरिया मिल रहा
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सिर्फ एक बैग यूरिया[/caption]
3 दिन परेशान होने के बाद किसानों को एकड़ के हिसाब से सिर्फ एक बैग यूरिया मिल रहा है.
इन जिलों की स्थिति यह साफ दिखाती है कि मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है, जिसका खामियाजा किसान उठा रहे हैं।
बुंदेलखंड के टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में स्थिति और विकराल है. यहां किसानों को दो बोरी यूरिया के लिए दो अलग-अलग वितरण केंद्रों पर जाना पड़ रहा है, जिससे रोष बढ़ गया है.
कार्यालय के सामने चक्काजाम किया
टीकमगढ़ में किसानों ने कलेक्टर कार्यालय के सामने चक्काजाम किया. इसके बाद भी कई किसानों को बारी आने पर स्टॉक खत्म होने की सूचना मिली थी..
बमीठा, हरपालपुर, बल्देवगढ़, पलेरा और जतारा में भी किसानों ने चक्काजाम किया और विरोध जताया..
श्योपुर में खाद वितरण केंद्रों पर सुबह से लंबी लाइनें लग रही हैं।
मामले को लेकर प्रदेश के किसानों का कहना है कि इस बार बारिश अच्छी होने के कारण फसल क्षेत्र बढ़ा है, ऐसे में सरकार को DAP, NPK और यूरिया की पर्याप्त व्यवस्था पहले ही कर लेनी चाहिए थी..
इस वर्ष मांग बढ़कर 23 लाख टन हो गई
पिछले वर्ष रबी में 20 लाख टन यूरिया की मांग थी, जबकि इस वर्ष मांग बढ़कर 23 लाख टन हो गई है। किसानों के अनुसार मांग बढ़ने का अनुमान सरकार को पहले से था, लेकिन आपूर्ति उसी अनुरूप नहीं की गई.
जिस कारण आज पुरे प्रदेश के किसानों में आक्रोश है.