मध्य प्रदेश

Portable 3D X-Ray Machine: एम्स भोपाल-आईआईटी इंदौर का कमाल: हादसे की जगह ही मिलेगी सीटी स्कैन जैसी जांच

Portable 3D X-Ray Machine: दुनिया का पहला एआई आधारित पोर्टेबल 3D एक्स-रे

सड़क हादसों और आपात स्थितियों में हर मिनट कीमती होता है। पहला घंटा जिसे गोल्डन आवर कहा जाता है मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। इसी सोच के साथ एम्स भोपाल और आईआईटी इंदौर मिलकर एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो अस्पताल पहुँचने से पहले ही गंभीर घायल मरीजों की जांच कर सके. यह यूनिट AI आधारित पोर्टेबल 3D एक्स-रे मशीन होगी, जो एक्स-रे को कई एंगल से कैप्चर कर थ्री-डायमेंशनल इमेज तैयार करेगी। यानी, सीटी स्कैन जैसी सुविधा सीधे हादसे के स्थल पर उपलब्ध होगी।

Portable 3D X-Ray Machine: ICMR की मंजूरी 

इस महत्वाकांक्षी शोध परियोजना को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने मंजूरी दी है। कुल 1224 रिसर्च प्रस्तावों में से केवल 38 को चुनकर फंडिंग दी गई है, और यह मध्यप्रदेश से चयनित इकलौता प्रोजेक्ट है। फंडिंग राशि 8 करोड़ रुपये है।

समय पर जांच न मिलना बना मौत का कारण

भारत में सड़क दुर्घटनाओं या आपात स्थितियों में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण समय पर आधुनिक जांच और इलाज न मिल पाना है। अकेले मध्यप्रदेश में हर साल लगभग डेढ़ लाख लोग सड़क हादसों या गंभीर दुर्घटनाओं में घायल होते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के विश्लेषण में यह सामने आया है कि ट्रॉमा मरीजों की मृत्यु में जांच सुविधाओं तक पहुँचने का समय सबसे निर्णायक होता है.अभी सीटी स्कैन और अन्य आधुनिक जांच मशीनें केवल बड़े शहरों और चुनिंदा अस्पतालों में उपलब्ध हैं। ऐसे में कई बार घायल मरीजों तक जीवन रक्षक जांच पहुँचने में देर हो जाती है।

पोर्टेबल 3D यूनिट कैसे करेगी काम

मशीन कम रेडिएशन के साथ थ्री-डायमेंशनल इमेज तैयार करेगी। AI एल्गोरिद्म कई एंगल से लिए गए एक्स-रे इमेज को प्रोसेस कर सीटी-स्कैन जैसी हाई डेफिनेशन इमेज देगा। रेडिएशन स्तर पारंपरिक सीटी स्कैन की तुलना में लगभग 500 गुना कम होगा। यह मशीन पूरी तरह पोर्टेबल होगी. इसे एंबुलेंस या हादसे के स्थल पर ले जाकर तुरंत जांच की जा सकेगी। इससे ट्रॉमा मामलों में त्वरित और सटीक निर्णय लेना संभव होगा.