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Thyroid and Weight Gain: क्या थायराइड से बढ़ता है वजन? जानिए इसके लक्षण, उपाचार...

Thyroid and Weight Gain: आधुनिक जीवनशैली और खानपान में हुए बदलावों के चलते थायराइड एक आम स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। भारत में लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, लेकिन अब भी इसको लेकर जागरूकता की कमी है। यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाई जाती है। आज हम इस आर्टिकल में थायराइड क्या है, इसके लक्षण और उपचार के बारें में बताएंगे। Read More: How to Control Anger: गुस्से की वजह से हो रहें हैं रिश्ते खराब, जानिए गुस्से नियंत्रित करने के उपाय…

जानिए क्या है थायराइड?

थायराइड एक तितली के आकार की ग्रंथि (ग्लैंड) होती है, जो गले के सामने के हिस्से में स्थित होती है। यह ग्रंथि थायरॉक्सिन (T4) और ट्रायआयोडोथायरोनिन (T3) नामक हार्मोन बनाती है, जो शरीर की मेटाबॉलिज्म दर यानी चयापचय दर को नियंत्रित करते हैं। थायराइड हार्मोन हमारे शरीर के तापमान, हृदय गति, पाचन, वजन और मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है।

थायराइड से होती हैं ये समस्याएं...

1. हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) – जब थायराइड हार्मोन की कमी हो जाती है। 2. हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) – जब थायराइड हार्मोन का स्तर बहुत अधिक हो जाता है।

थायराइड होने के कारण...

1. थायराइड ग्रंथि को सही तरीके से काम करने के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है। इसकी कमी से हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है। 2. ऑटोइम्यून डिजीज – हाशिमोटो थायरायडिटिस (Hashimoto’s Thyroiditis) और ग्रेव्स डिजीज (Graves’ Disease) जैसे ऑटोइम्यून रोग थायराइड ग्रंथि पर असर डालते हैं। 3. ज्यादा तनाव और असंतुलित दिनचर्या थायराइड हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकती है। 4. दवाइयों का साइड इफेक्ट – कुछ दवाएं जैसे लिथियम या एमियोडैरोन भी थायराइड कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती हैं।

थायराइड के सामान्य लक्षण...

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण...

1. अत्यधिक थकान, वजन बढ़ना। 2. ठंड अधिक लगना, डिप्रेशन। 3. बाल झड़ना, त्वचा का रूखापन 4. मासिक धर्म में अनियमितता

हाइपरथायरायडिज्म (थायराइड हार्मोन की अधिकता) के लक्षण...

1. तेजी से वजन घटना 2. नींद की कमी 3. अधिक पसीना आना 4. घबराहट और बेचैनी 5. आंखों का बाहर निकलना (Graves' disease में)

थायराइड की पहचान कैसे करें?

1. TSH (Thyroid Stimulating Hormone) टेस्ट – यह सबसे मुख्य जांच है। 2. T3 और T4 टेस्ट – थायराइड हार्मोन के स्तर को मापने के लिए। 3. एंटीबॉडी टेस्ट – ऑटोइम्यून रोगों की पुष्टि के लिए। इन परीक्षणों से यह पता चलता है कि थायराइड ग्रंथि सामान्य रूप से काम कर रही है या नहीं।

इलाज और नियंत्रण के उपाय...

दवा का नियमित सेवन...

हाइपोथायरायडिज्म के मरीजों को डॉक्टर द्वारा दी गई थायरॉक्सिन दवा रोज सुबह खाली पेट लेनी होती है। हाइपरथायरायडिज्म के लिए एंटी-थायराइड दवाएं दी जाती हैं।

स्वस्थ आहार...

थायराइड रोगी को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए, उसे आयोडीन युक्त नमक का सेवन करना चाहिए। 1. सेलेनियम और जिंक युक्त खाद्य पदार्थ खाएं – जैसे कद्दू के बीज, अंडा, साबुत अनाज। 2. ब्रोकली, फूलगोभी और सोया से परहेज करें। 3. अधिक फाइबर और प्रोटीन लें, चीनी और जंक फूड से परहेज करें।

करें योग और प्राणायाम..

1. सर्वांगासन 2. मत्स्यासन 3. हलासन 4. उज्जायी प्राणायाम योग करने से मेटाबॉलिज्म सुधरता है और हार्मोन संतुलन बेहतर होता है। और ध्यान, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद से तनाव घटाया जा सकता है, जिससे हार्मोन संतुलन बना रहता है।

आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय..

1. अश्वगंधा – हाइपोथायरायडिज्म में लाभदायक मानी जाती है। 2. त्रिफला – पाचन को बेहतर बनाता है और वजन नियंत्रण में मदद करता है। 3. धृतकुमारी (एलोवेरा) – शरीर से विषैले तत्व निकालने में सहायक। 4. हल्दी और अदरक – सूजन कम करने वाले गुण होते हैं। 5. आयोडीन: थायराइड से ग्रस्त मरीजों को आयोडीन (IODINE) युक्त आहार का सेवन ज्यादा मात्रा में करना चाहिए। इसका अच्छा स्रोत प्याज, लहसुन और टमाटर जैसी चीजें हैं। हालांकि इन उपायों को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरुर लें।