महिलाओं में कैल्शियम की कमी विभिन्न जीवन चरणों में

जब हड्डियां बोलने लगें दर्द की भाषा, समझिए शरीर में कैल्शियम की कमी ने दस्तक दे दी है

महिलाओं में कैल्शियम की कमी एक आम समस्या है, जो अक्सर शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों और जीवनशैली से जुड़ी होती है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिला के शरीर से बच्चे को कैल्शियम मिलता है, जिससे मां के शरीर में इसकी कमी हो सकती है। इसके अलावा मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटने लगता है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। विटामिन डी की कमी भी कैल्शियम के सही अवशोषण में बड़ी बाधा बनती है।

डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होता

कैल्शियम की कमी के लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर हो सकते हैं। इसमें हड्डियों और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, जल्दी थकान, नाखूनों का कमजोर होना और दांतों की समस्या शामिल हैं। कुछ महिलाओं को हाथ-पैरों में झुनझुनी या बार-बार हड्डी टूटने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होता है।

ड्राई फ्रूट्स भी सीमित मात्रा में फायदेमंद

कैल्शियम की कमी को संतुलित आहार से काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। दूध, दही, पनीर और छाछ जैसे डेयरी उत्पाद कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा रागी, तिल, सोयाबीन और चना भी शरीर को पर्याप्त कैल्शियम देते हैं। पालक, मेथी, सरसों और ब्रोकोली जैसी हरी सब्जियां भी हड्डियों के लिए लाभकारी होती हैं। बादाम और अंजीर जैसे ड्राई फ्रूट्स भी सीमित मात्रा में फायदेमंद हैं।

हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए

कैल्शियम के साथ विटामिन डी का सेवन भी जरूरी है, क्योंकि यह शरीर को कैल्शियम सोखने में मदद करता है। रोज सुबह हल्की धूप में कुछ समय बिताना, नियमित व्यायाम करना और सक्रिय जीवनशैली अपनाना हड्डियों को मजबूत बनाता है। कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के कैल्शियम सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं, जो नुकसानदायक हो सकता है। अधिक मात्रा में सप्लीमेंट लेने से किडनी स्टोन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इसका सेवन हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।