“डबल इंजन सरकार में भूख से हुईं काफी मौतें, अब शून्य”: रांची में झारखण्ड सीएम सोरेन ने किया दावा
रांची में शुक्रवार को पंचायती राज दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि उनके छह-सात साल के कार्यकाल में राज्य में भूख से एक भी मौत नहीं हुई, जबकि पूर्व की ‘डबल इंजन’ सरकार के दौरान लोग राशन कार्ड लेकर भी भूखे मरते थे।
‘जिम्मेदारी से काम कर रही सरकार’: सीएम सोरेन
खेलगांव स्थित टाना भगत स्टेडियम में मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार सह मुखिया सम्मेलन को संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता ने जिस भरोसे के साथ सरकार बनाई, उसे पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।
महंगाई और पलायन पर सोरेन ने जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने महंगाई का जिक्र करते हुए कहा कि पहले कोरोना काल में मजदूर शहरों से लौटे थे, लेकिन अब बढ़ती महंगाई के कारण वापस लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाहर काम कर रहे श्रमिकों को भरपेट भोजन तक नहीं मिल पा रहा है, जो चिंता का विषय है।
पंचायत प्रतिनिधियों को बताया ‘सरकार की आंख और कान’
सोरेन ने पंचायत प्रतिनिधियों से सहयोग की अपील करते हुए उन्हें सरकार की “नाक और कान” बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में उनकी भूमिका बेहद अहम है और बिना उनके सहयोग के प्रगति संभव नहीं है। इस मौके पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले मुखिया, पंचायत समिति प्रमुख और जिला परिषद अध्यक्षों को सम्मानित भी किया गया।
पंचायतों में बनेगा आधार, समझौता हुआ
कार्यक्रम के दौरान पंचायत स्तर पर आधार पंजीकरण सुविधा शुरू करने की दिशा में पहल की गई। इसके लिए यूआईडीएआई के अधिकारियों के साथ समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया, जिससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही आधार से जुड़ी सेवाएं मिल सकेंगी।
तीन श्रेणियों में पंचायतों को मिले पुरस्कार
कार्यक्रम में पंचायतों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कृत किया गया। पहली श्रेणी में स्वच्छता, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास और गरीबी उन्मूलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को सम्मानित किया गया। दूसरी श्रेणी में स्वच्छता में उत्कृष्ट कार्य के लिए पंचायतों को 10-10 लाख रुपये दिए गए।
वहीं, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को 15वें वित्त आयोग की राशि के बेहतर उपयोग के लिए क्रमशः 15 लाख और 20 लाख रुपये के पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पहली बार इस तरह के पुरस्कार दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र से फंड लाने के लिए काफी प्रयास करने पड़े और बार-बार पत्राचार के बाद ही राशि मिल सकी।