अंजना ओम कश्यप और खान सर के बीच आरोप-प्रत्यारोप के

अंजना ओम कश्यप और खान सर के बीच विवाद और मानहानि मामला

अंजना ओम कश्यप बनाम खान सर : विवाद और मानहानि मामले की पूरी कहानी

पृष्ठभूमि : विवाद की शुरुआत कैसे हुई

यह विवाद 29 मई 2026 से जुड़ा है, जब आजतक की मैनेजिंग एडिटर और एंकर अंजना ओम कश्यप ने NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) पेपर लीक विवाद के बाद एक टेलीविज़न डिबेट होस्ट की थी। इस प्रसारण के दौरान कश्यप ने यूट्यूब आधारित कोचिंग शिक्षकों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और इन "स्टार टीचर्स" के बढ़ते व्यावसायिक प्रभाव पर चिंता जताई, साथ ही यह भी कहा कि कुछ शिक्षक अपने विषय-ज्ञान से बाहर के मुद्दों पर टिप्पणी कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी टिप्पणियां एक सार्वजनिक महत्व के विषय पर निष्पक्ष पत्रकारिता थीं।

उनकी इन टिप्पणियों से कई प्रमुख ऑनलाइन शिक्षक नाराज़ हो गए, जिनमें सबसे अहम नाम था फैसल खान, जिन्हें खान सर के नाम से जाना जाता है — पटना स्थित यूट्यूबर और खान ग्लोबल स्टडीज़ के संस्थापक, जिनके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच लाखों फॉलोअर्स हैं।

विवाद कैसे बढ़ा

30 मई से 4 जून 2026 के बीच, खान सर और कई अन्य शिक्षकों ने सार्वजनिक रूप से जवाब दिया और कश्यप पर गलत जानकारी फैलाने और निहित स्वार्थों के लिए काम करने का आरोप लगाया। कश्यप और उनकी कंपनी टीवी टुडे नेटवर्क का आरोप है कि यह उनके खिलाफ एक सुनियोजित सोशल मीडिया और प्रसारण अभियान था, जिसमें "बिकाऊ पत्रकार", "चाटुकार", "दलाल" और "दलाली", तथा "फेक न्यूज़ की दुकान" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

खान सर के अलावा इस विवाद में नामित अन्य शिक्षकों में शामिल हैं :

- अभिनय शर्मा (संस्थापक, अभिनय मैथ्स) - बबीता त्यागी (सह-संस्थापक, ICS कोचिंग) - अरविंद भदौरिया (नैया पार एजुकेशन) - मनीष यादव

कुछ X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट्स और 4PM न्यूज़ नेटवर्क को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

इस विवाद का एक विशेष रूप से संवेदनशील पहलू यह रहा कि खान सर ने कश्यप के बच्चों के स्कूल का नाम सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया। कश्यप का कहना है कि इस जानकारी का मूल विवाद से कोई संबंध नहीं था, और इससे उनके परिवार को उत्पीड़न, अवांछित ध्यान, सुरक्षा संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ा, साथ ही उन्होंने अपने परिवार को धमकियां मिलने की बात भी कही।

मानहानि का मुकदमा

कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने खान सर और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में एक सिविल मानहानि का मुकदमा दायर किया, जिसमें निम्नलिखित मांगें रखी गईं:

- ₹2 करोड़ (2 करोड़ रुपये) हर्जाना - सोशल मीडिया से कथित मानहानिकारक सामग्री हटाना - आगे किसी भी अपमानजनक टिप्पणी को रोकने के लिए निषेधाज्ञा (रोक का आदेश)

वादियों (याचिकाकर्ताओं) का तर्क है कि प्रतिवादियों की भाषा वैध आलोचना की सीमा से कहीं आगे जाकर कश्यप की प्रतिष्ठा, गरिमा और पेशेवर छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का प्रयास थी। वहीं प्रतिवादियों का कहना है कि उनकी टिप्पणियां कश्यप के अपने प्रसारण की सीधी प्रतिक्रिया थीं, जिसमें उन्होंने ऑनलाइन शिक्षकों की आलोचना की थी।

यह मामला पहले जस्टिस नीना बंसल कृष्णा (अवकाशकालीन पीठ) के समक्ष सूचीबद्ध हुआ और बाद में जस्टिस तुषार राव गेडेला ने इसकी सुनवाई की।

अदालती कार्यवाही : अंतरिम राहत न मिलने से मध्यस्थता तक

17 जून 2026 : एक पहले की सुनवाई में जस्टिस मधु जैन ने कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क को उनकी निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने नोट किया कि कुछ प्रतिवादियों ने अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया था, और उन्हें ऐसा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया।

2 जुलाई 2026 — नवीनतम आदेश : यह मामला (केस टाइटल: *अंजना ओम कश्यप एवं अन्य बनाम फैसल खान एवं अन्य*, संदर्भ 2026 LiveLaw (Del) 608) एक बार फिर जस्टिस तुषार राव गेडेला के समक्ष आया, जिन्होंने एक बार फिर तत्काल अंतरिम निषेधाज्ञा देने से इनकार किया और पूरे विवाद को मध्यस्थता (मीडिएशन) के लिए भेज दिया।

2 जुलाई की सुनवाई और आदेश की मुख्य बातें :

- अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि "नुकसान तो पहले ही हो चुका है" और अब पक्षकार केवल स्थिति को संभालने की कोशिश कर सकते हैं, और सुझाव दिया कि आपसी समझौता ही आगे बढ़ने का बेहतर रास्ता है। - वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव को मध्यस्थ (मीडिएटर) नियुक्त किया गया, और दोनों पक्षों को उसी शाम 4 बजे उनके समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया। - अदालत ने खान सर और अन्य शिक्षक-प्रतिवादियों को कश्यप के बच्चों से जुड़ी जानकारी वाली सभी सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश दिया, और कहा कि इस तरह की निजी जानकारी — विशेष रूप से नाबालिगों से जुड़ी — को कभी भी सार्वजनिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहिए था, खासकर जब प्रतिवादी स्वयं ऐसे शिक्षक हैं जो युवा छात्रों को पढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। - साथ ही अदालत ने कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क को भी संयम बरतने और मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों के खिलाफ आगे कोई टिप्पणी न करने का निर्देश दिया। - जस्टिस गेडेला ने मौखिक रूप से कहा कि सार्वजनिक हस्तियों की आलोचना करना अनुमत है, लेकिन यह "शालीन स्तर" पर होनी चाहिए, और सुझाव दिया कि आपत्तिजनक शब्दों या वाक्यांशों की पहचान कर आपसी सहमति से उन्हें हटाया जाए, न कि लंबी मुकदमेबाज़ी के ज़रिए। - खान सर की ओर से पेश वकील (अधिवक्ता मुरारी तिवारी) ने अदालत को आश्वासन दिया कि बच्चों से संबंधित पोस्ट हटा दी जाएंगी; वहीं कश्यप की ओर से पेश वकीलों (अधिवक्ता हृषिकेश बरुआ, उत्कर्ष द्विवेदी और प्रज्ञा अग्रवाल) ने दोहराया कि बच्चों के स्कूल का खुलासा होने से कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलीं और यह सभी स्वीकार्य सीमाओं का उल्लंघन था। - अदालत ने प्रतिवादियों द्वारा दायर उस आवेदन पर भी नोटिस जारी किया, जिसमें वाद (प्लेंट) को खारिज करने की मांग की गई थी।

इस मामले को 9 जुलाई 2026 के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जब अदालत मध्यस्थता प्रक्रिया के नतीजे की समीक्षा करेगी और यह तय करेगी कि मामले को आगे बढ़ाने की ज़रूरत है या नहीं।

जनता और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस मामले ने प्रेस की स्वतंत्रता, ऑनलाइन आलोचना, और आलोचकों को चुप कराने के लिए मानहानि के मुकदमों (जिन्हें कभी-कभी SLAPP सूट — स्ट्रैटेजिक लॉसूट्स अगेंस्ट पब्लिक पार्टिसिपेशन — कहा जाता है) के इस्तेमाल को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है :

- आप नेता सौरभ भारद्वाज ने सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थकों पर असहमति को दबाने के लिए मानहानि के मुकदमों के दुरुपयोग का आरोप लगाया, और कहा कि जो एंकर दूसरों की आलोचना करते हैं, उन्हें खुद आलोचना के लिए भी तैयार रहना चाहिए। - वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागळे ने सार्वजनिक रूप से मुकदमा दायर करने के फैसले पर सवाल उठाए। - वकील आशीष गहलोत ने इस मुकदमेबाज़ी को SLAPP सूट बताया, जिसका मकसद वास्तविक न्याय पाना नहीं बल्कि जल्द कंटेंट हटवाना और जनसंपर्क (PR) लाभ हासिल करना है। - वहीं कई सोशल मीडिया यूज़र्स खान सर के समर्थन में सामने आए हैं, और उनकी टिप्पणियों को मुख्यधारा मीडिया के खिलाफ जायज़ प्रतिक्रिया बता रहे हैं, न कि कार्रवाई योग्य मानहानि।

अभी मामला कहां खड़ा है

3 जुलाई 2026 तक, दिल्ली उच्च न्यायालय के 2 जुलाई के आदेश के बाद यह मामला मध्यस्थता की प्रक्रिया में है। अब तक किसी भी चरण में कोई अंतरिम निषेधाज्ञा नहीं दी गई है — 17 जून को भी और फिर 2 जुलाई को भी, अदालत ने रोक का आदेश पारित करने के बजाय पक्षकारों को आपसी समझौते की ओर प्रेरित करने का रास्ता चुना। खान सर पक्ष कश्यप के बच्चों से जुड़ी पोस्ट हटाने पर सहमत हो गया है, और अगली सुनवाई तक दोनों पक्षों को आपसी संयम बरतने का निर्देश दिया गया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव के समक्ष होने वाली मध्यस्थता के नतीजे की समीक्षा अदालत 9 जुलाई 2026 को करेगी, जिससे यह तय होगा कि ₹2 करोड़ का यह मानहानि मुकदमा पूर्ण सुनवाई (ट्रायल) की ओर बढ़ेगा या समझौते के ज़रिए सुलझ जाएगा।

--- *यह लेख 3 जुलाई 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक अदालती रिपोर्टिंग और समाचार कवरेज पर आधारित है। मामला मध्यस्थता और आगामी अदालती सुनवाइयों के साथ आगे बढ़ने पर विवरण बदल सकते हैं।*