गुजरात

Gujarat politics: गुजरात में केजरीवाल का मिशन तेज, ‘आप’ दिखा रही आक्रामक तेवर

Gujarat politics: गुजरात उपचुनावों में मिली जीत ने आम आदमी पार्टी (आप) को नई ऊर्जा दी है। विसावदर सीट पर सफलता के बाद पार्टी अपने बढ़े हुए हौसले को और मजबूत करने में जुटी है। इसी कड़ी में पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब खुद गुजरात की कमान संभालने आ रहे हैं। केजरीवाल 1 जुलाई को अहमदाबाद पहुंचेंगे और 2 जुलाई को वैष्णो देवी सर्किल पर आयोजित ‘थैंक यू गुजरात’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वे उपचुनाव में पार्टी को समर्थन देने के लिए जनता का आभार जताएंगे। इसके साथ ही वे भाजपा के गढ़ गुजरात में पार्टी के विस्तार का अभियान भी शुरू करेंगे। [caption id="attachment_91522" align="alignnone" width="300"] Gujarat politics[/caption]

Gujarat politics: भाजपा की रणनीतियों को चुनौती देने की तैयारी में

गुजरात विधानसभा चुनावों में विसावदर सीट पर जीत के बाद आम आदमी पार्टी की सक्रियता बढ़ गई है। दिल्ली में एमसीडी चुनाव में हार के बाद पार्टी पर निराशा के बादल मंडरा रहे थे, लेकिन गुजरात की जीत ने पार्टी को एक नई उम्मीद दी है। केजरीवाल अब पंजाब के बाद गुजरात पर भी फोकस करेंगे और भाजपा की रणनीतियों को चुनौती देने की तैयारी में हैं।

Gujarat politics: एक घंटे के भीतर बाहर का रास्ता दिखा दिया

पार्टी इस मौके को किसी भी कीमत पर हाथ से नहीं जाने देना चाहती। यही वजह है कि जब बोटाद के विधायक उमेश मकवाना ने पार्टी से बगावत के सुर उठाए, तो आप नेतृत्व ने फौरन एक्शन लेते हुए उन्हें प्रेस कांफ्रेंस के एक घंटे के भीतर बाहर का रास्ता दिखा दिया।

इसुदान गढ़वी की अहम भूमिका

विसावदर की जीत ने गुजरात में आप को नई संजीवनी दी है। पार्टी के भीतर इसुदान गढ़वी का कद और बढ़ा है। पत्रकारिता छोड़कर राजनीति में आए गढ़वी, गुजरात में पार्टी का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दिल्ली में एमसीडी चुनाव में हार के बाद चर्चा थी कि आप गुजरात में बिखर सकती है, लेकिन विसावदर की जीत ने पार्टी के मिशन गुजरात को फिर से जीवंत कर दिया।

Gujarat politics: भाजपा के लिए बड़ी भूल साबित हो सकती

वहीं, गोपाल इटालिया के विधानसभा में पहुंचने से पार्टी और ज्यादा आक्रामक नजर आ रही है। मनोज सोरठिया को विसावदर के मोर्चे पर लगाने और इसुदान गढ़वी के नेतृत्व में पार्टी ने यह दिखा दिया कि वह गुजरात में भाजपा की कमजोर नसों को पहचानती है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इसुदान गढ़वी को कमजोर समझना भाजपा के लिए बड़ी भूल साबित हो सकती है।

सदस्यता अभियान पर जोर

‘आप’ अब अपनी ताकत बढ़ाने के लिए बड़ा सदस्यता अभियान शुरू करने जा रही है। केजरीवाल के दौरे के अगले ही दिन से पार्टी ‘कैच द रेन’ की तर्ज पर अभियान शुरू करेगी, जिसमें 1 लाख नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें करीब 5 हजार स्थानीय स्तर के नेता शामिल हैं। खास बात यह है कि पार्टी कांग्रेस के नाराज और निष्क्रिय पूर्व पदाधिकारियों को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। Gujarat politics: यह अभियान ऐसे समय शुरू हो रहा है जब कांग्रेस का ‘नूतन गुजरात-नूतन कांग्रेस’ अभियान बैकफुट पर चला गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल के इस्तीफे ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जिसका फायदा आप उठाना चाहती है। अब देखना यह होगा कि केजरीवाल की अगुवाई में आम आदमी पार्टी गुजरात में भाजपा को कितनी चुनौती दे पाती है और कांग्रेस की कमजोरियों का कितना लाभ उठा पाती है।