गुजरात

द्वारका: खंभालिया में अवैध निर्माण पर बुलडोजर, तेली और घी नदी के किनारे तोड़फोड़

Khambhalia illegal construction demolition: गुजरात के द्वारका जिले के खंभालिया में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। तेली नदी और घी नदी के किनारे बने अवैध मकानों और दुकानों पर लगातार बुलडोजर चल रहा है। खंभालिया नगर पालिका ने इन क्षेत्रों में करीब 100 लोगों को अवैध निर्माण हटाने के लिए नोटिस जारी किया था। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्रवाई तेज कर दी है, जिससे स्थानीय लोगों में दबाव और असंतोष का माहौल है।

नदी के किनारे अवैध निर्माण पर नकेल

खंभालिया के मीटिंग रोड और स्टेशन रोड के पास तेली नदी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। सरकारी जमीन पर बने इन अवैध मकानों और दुकानों ने न केवल नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित किया, बल्कि बाढ़ जैसे खतरों को भी बढ़ावा दिया। खंभालिया नगर पालिका ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण किया और अवैध निर्माण करने वालों को नोटिस जारी किया। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि निर्धारित समय के भीतर निर्माण हटाना होगा, अन्यथा प्रशासन स्वयं कार्रवाई करेगा। Read More: बनासकांठा: ग्राम पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन की अहम बैठक

तोड़फोड़ से स्थानीय लोगों में हड़कंप

नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद नगर पालिका ने तेली और घी नदी के किनारे बने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई में कई आवासीय मकान और दुकानें ध्वस्त की गईं। तोड़फोड़ के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कार्रवाई से उनके सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। कुछ लोगों ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया, जबकि नगर पालिका का कहना है कि यह कदम शहर की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी था।

Khambhalia illegal construction demolition: प्रशासन का दबाव मुक्ति तंत्र

खंभालिया में अवैध निर्माण के खिलाफ यह कार्रवाई प्रशासन के दबाव मुक्ति तंत्र का हिस्सा मानी जा रही है। तेली और घी नदी के किनारे बने अवैध निर्माण नदियों के जलप्रवाह को बाधित कर रहे थे, जिससे बरसात के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ गया था। नगर पालिका का कहना है कि यह कार्रवाई नदियों के प्राकृतिक स्वरूप को बचाने और शहर को सुरक्षित रखने के लिए अनिवार्य थी। हालांकि, प्रभावित लोग इस कार्रवाई से नाराज हैं और प्रशासन से पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। घनश्याम सिंह वडेर की रिपोर्ट