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14 महीने की सबसे बड़ी राहत: खाने-पीने की चीजें हुईं सस्ती
wpi inflation may 2025 lowest since 2024 : थोक महंगाई दर 14 महीने के निचले स्तर पर
wpi inflation may 2025 lowest since 2024 : देशवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। मई 2025 में भारत की थोक महंगाई दर (WPI) घटकर 0.39% पर आ गई है, जो कि पिछले 14 महीनों में सबसे कम है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 16 जून को यह आंकड़े जारी किए हैं। खाने-पीने की वस्तुओं और आवश्यक सामानों की कीमतों में गिरावट इसका बड़ा कारण है।
? अप्रैल और मार्च में क्या था हाल?
- अप्रैल 2025: WPI 2.05% से घटकर 0.85% हो गया था (13 महीने का निचला स्तर)
- मार्च 2024: WPI 0.53% से गिरकर 0.26% पर आ गया था
? कौन-कौन सी चीजें सस्ती हुईं?
थोक बाजार में जिन वस्तुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, वो हैं:| श्रेणी | पहले की दर | अब की दर |
|---|---|---|
| प्राइमरी आर्टिकल्स | -1.44% | -2.02% |
| फूड इंडेक्स (खाद्य वस्तुएं) | 2.55% | 1.72% |
| फ्यूल और पावर | -2.18% | -2.27% |
| मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स | 2.62% | 2.04% |
? रिटेल महंगाई भी आई निचले स्तर पर
इससे पहले 12 जून को रिटेल महंगाई (CPI) के आंकड़े आए थे, जिसमें बताया गया कि मई 2025 में CPI गिरकर 2.82% हो गया है — जो 6 साल का न्यूनतम स्तर है। मार्च 2019 में यह 2.86% था। मार्च 2025 में CPI 3.34% और अप्रैल में 3.16% रही थी। यह लगातार तीसरा महीना है जब महंगाई दर RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।? WPI क्या है और इसका असर कैसे पड़ता है?
WPI (Wholesale Price Index) वह माप है जिससे थोक बाजार में वस्तुओं की कीमतों का विश्लेषण होता है। इसका आम आदमी पर अप्रत्यक्ष असर होता है। यदि लंबे समय तक WPI ऊंचा रहता है, तो उत्पादक (Producers) इसका भार ग्राहकों पर डालते हैं, जिससे रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं। सरकार केवल टैक्स कटौती (जैसे एक्साइज ड्यूटी) जैसे उपायों से WPI को नियंत्रित कर सकती है — लेकिन यह सीमित होता है।? WPI की संरचना
WPI को तीन हिस्सों में बांटा गया है:- प्राइमरी आर्टिकल्स (22.62%) – खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुएं
- फ्यूल एंड पावर (13.15%) – पेट्रोल, डीज़ल, बिजली
- मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स (64.23%) – फैक्ट्री में बनने वाले सामान जैसे मेटल, रबर, केमिकल्स
? महंगाई कैसे मापी जाती है?
भारत में दो प्रमुख महंगाई इंडेक्स होते हैं:- रिटेल महंगाई (CPI) – आम ग्राहकों द्वारा दी जाने वाली कीमतों पर आधारित
- थोक महंगाई (WPI) – व्यापारियों द्वारा एक-दूसरे से खरीदी गई वस्तुओं की कीमतें