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Sitare Zameen Par Movie Review: डाउन सिंड्रोम से जूझते किरदारों ने जीता दिल, देखे रिव्यू...

Sitare Zameen Par Movie Review: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर आमिर खान की मच अवेटेड फिल्म 'सितारे जमीन पर' आज बॉक्स ऑफिस में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म के डायरेक्टर आर. एस. प्रसन्ना हैं और यह फिल्म डाउन सिंड्रोम से गुजर रहें लोगों पर आधारित है। फिल्म की टैगलाइन है ‘सबका अपना-अपना नॉर्मल’, जो खुद में ही एक भावनात्मक संदेश लिए हुए है। लोगों ने कहा दिल छू लेने वाली मूवी है। आइए जाने फिल्म की कहानी और लोगों के रिव्यू... Read More: ‘Sitare Zameen Par’ Trailer Out: आमिर खान की फिल्म में दिखे 10 खास सितारे…

फिल्म की कहानी...

गुलशन अरोड़ा (आमिर खान) एक जूनियर बास्केटबॉल कोच है — छोटा कद, लेकिन बड़ी हठ और आत्म-अहम से भरा हुआ। वह अपनी मां (डॉली अहलूवालिया) के साथ रहता है, और उसकी अपनी पत्नी (जेनेलिया डिसूज़ा) से अनबन चल रही है, जो कभी एक्ट्रेस बनने का सपना लेकर आई थी लेकिन अब वह सपना अधूरा रह गया है।

जीवन की ठोकरें और एक सजा जो बदल देती है सबकुछ

गुलशन का पेशेवर जीवन भी पटरी से उतरा हुआ है। खेल संस्थान से निलंबन, बार-बार उसकी हाइट पर की जाने वाली छींटाकशी, और खुद से लगातार लड़ता उसका आत्मसम्मान। एक रात नशे की हालत में गाड़ी चलाने और सार्वजनिक झगड़े के बाद अदालत से उसे जेल नहीं, बल्कि कम्युनिटी सर्विस की सजा मिलती है। इस सजा के तहत उसे डाउन सिंड्रोम से पीड़ित युवा-वयस्कों की एक फुटबॉल टीम को ट्रेन करना होता है — एक ऐसा काम जो न उसके कौशल के दायरे में है, न ही उसके दिल के करीब।

याद रह जाने वाले डॉयलाग...

"सबका अपना-अपना नॉर्मल होता है।" यह एक सादा लेकिन गहरा वाक्य है – जो हमारे समाज की सोच को बदलने की ताकत रखता है। यह संवाद आज की दुनिया के लिए एक जरूरी संदेश है।

अभिनय: आमिर खान से लेकर न्यूरोडाइवर्जेंट कलाकारों तक

गुलशन के रूप में आमिर खान ने एक बार फिर साबित किया है कि वह सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि स्टोरीटेलर भी हैं। ‘तारे जमीन पर’ के आदर्शवादी शिक्षक से आगे बढ़ते हुए, इस बार वे एक खामियों से भरे और असहज किरदार में नजर आते हैं। उनकी एक्टिंग काफी नेचुरल लगती है, कई भी ओवर एक्टिंग नही लगती और उनका इमोशन और ईमानदारी साफ नजर आती है। गुलशन की पत्नी की भूमिका में जेनेलिया डिसूजा ने बेहद सौम्य और रोशनी-सी भूमिका निभाई है। उनका किरदार गुलशन के जीवन में भावनात्मक संतुलन लाता है और फिल्म को एक मानवीय स्पर्श देता है।

असल सितारे: दस न्यूरोडाइवर्जेंट एक्टर्स..

फिल्म के असली हीरो वे दस न्यूरोडाइवर्जेंट कलाकार हैं, जिन्होंने अपने अभिनय से दिल जीत लिया। इन कलाकारों का प्रदर्शन सच्चा और असरदार है। न कोई बनावट, न दिखावा – सिर्फ जीवन की सहज प्रस्तुति। इन कलाकारों के लिए स्टैंडिंग ओवेशन बनता है।

टीम के अनोखे सदस्य, जो 'सितारे' बन जाते हैं।

गुलशन की टीम में हैं -

सुनील (आशीष पेंडसे), सतबीर (आरुष दत्ता), लोटस (आयुष भंसाली), शर्मा जी (रिषि शहानी), गुड्डू (गोपी कृष्ण के वर्मा), राजू (ऋषभ जैन), बंटू (वेदांत शर्मा), गोलू (सिमरन मंगेशकर), करीम (संवित देसाई), हरगोविंद (नमन मिश्रा) शुरुआत में गुलशन इन सभी को 'पागल' और बेकार मानता है। उसका रवैया कठोर, चिड़चिड़ा और अपमानजनक होता है। लेकिन जैसे-जैसे ये बच्चे मैदान में मेहनत करते हैं, पसीना बहाते हैं और छोटी-छोटी जीतें हासिल करते हैं, गुलशन का नजरिया बदलने लगता है।

निर्देशन और लेखन...

निर्देशक आर.एस. प्रसन्ना और लेखक दिव्य शर्मा ने मिलकर एक ऐसी फिल्म बनाई है जो भावनात्मक होकर भी भावुकता से दूर रहती है। बातचीत, कैमरा वर्क और सिचुएशन्स – सब कुछ बड़े संयम और सोच के साथ तैयार किया गया है।

स्पैनिश फिल्म ‘चैंपियंस’ की हिंदी रीमेक…

आमिर खान ने हाल ही में खुलासा किया कि ये फिल्म 2018 में आई स्पैनिश फिल्म ‘चैंपियंस’ की हिंदी रीमेक है। यह फिल्म स्पेन की एक रियल बास्केटबॉल टीम की कहानी पर आधारित थी। इसका हॉलीवुड रीमेक भी बन चुका है, जिसमें वुडी हैरेलसन ने मुख्य भूमिका निभाई थी। अब आमिर इसे भारतीय दर्शकों के लिए पेश कर रहे हैं।

“टीम सितारे के साथ हंसेंगे और रोएंगे भी” – सचिन

सचिन ने फिल्म देखने के बाद कहा –
“फिल्म बहुत अच्छी लगी। ये ऐसी मूवी है जिसमें आप टीम सितारे के साथ हंसते भी हो और रोते भी हो। मैंने हमेशा कहा है कि स्पोर्ट्स में सिखाने की ताकत होती है – इस फिल्म में भी इतने सारे मैसेज मिलते हैं। ये सबको साथ लाने का काम करती है। मैं सभी एक्टर्स को बिग थम्स अप देता हूं, बहुत अच्छा काम किया है। वेरी वेल डन और ऑल द बेस्ट।”

लोगों ने दिए रिव्यू...