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Controversy Over Kesari Chapter 2: फिल्म पर इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप, TMC ने दर्ज करवाई FIR!
Controversy Over Kesari Chapter 2: अक्षय कुमार की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'केसरी चैप्टर 2: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ जलियांवाला बाग' यह फिल्म बॉक्स ऑफिस में 18 अप्रैल को रिलीज हुई थी, जो कि अब विवादों में घिर गई है। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने फिल्म के निर्माताओं पर इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
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TMC का आरोप...
बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में TMC नेताओं ने दावा किया कि फिल्म में कई बंगाली क्रांतिकारियों के नाम और विवरणों को गलत तरीके से दर्शाया गया है। खुदीराम बोस का नाम फिल्म में 'खुदीराम सिंह' बताया गया है। बारीन्द्र कुमार घोष को 'बीरेंद्र कुमार' कहा गया और उनकी जगह अमृतसर निवासी बताया गया है। वहीं क्रांतिकारी हेमचंद्र कानूनगो की भूमिका को हटाकर एक काल्पनिक किरदार 'कृपाल सिंह' जोड़ा गया है। TMC नेताओं कुणाल घोष और अरुप चक्रवर्ती ने कहा कि ये केवल गलती नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है बंगाल की ऐतिहासिक भूमिका को मिटाने की।ममता बनर्जी का बयान...
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना फिल्म का नाम लिए इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,"हम इसकी निंदा करते हैं। बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है। यह सब भाजपा के समर्थन से हो रहा है।"TMC ने यह भी आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब केंद्र सरकार या उसके समर्थकों ने बंगाल के गौरवमयी इतिहास को कमजोर करने की कोशिश की गई है।
फिल्म की स्क्रिप्ट पर उठे सवाल...
TMC नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि जब फिल्म में इतने बड़े-बड़े ऐतिहासिक बदलाव किए गए, तो सेंसर बोर्ड ने इसे पास कैसे कर दिया? नेताओं ने बोर्ड से जवाब मांगा कि क्या तथ्यों की जांच करना उनकी जिम्मेदारी नहीं है?BJP का पलटवार...
इस मामले पर भाजपा सांसद समिक भट्टाचार्य ने प्रतिक्रिया दी और TMC के आरोपों को बेबुनियाद बताया।उन्होंने कहा-
"फिल्मों में काल्पनिक नाम और पात्र होना सामान्य बात है। इसमें BJP का कोई लेना-देना नहीं है। TMC खुद इतिहास के साथ क्या करती रही है, यह सब जानते हैं।"
बंगाली कलाकारों की नाराजगी, रिसर्च पर उठे सवाल...
बंगाली एक्टर ऋत्विक चक्रवर्ती ने भी फिल्म की आलोचना करते हुए कहा -
"यह या तो रिसर्च की कमी है या फिर स्क्रीनप्ले की लापरवाही। लेकिन इतना तय है कि बंगाली क्रांतिकारियों की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश की गई है।"