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Jubin Garg Funeral: सिंगर की अंतिम यात्रा के समय हजारो संख्या में पहुंचे फैंस!

Jubin Garg Funeral: फेमस सिंगर जुबीन गर्ग का पार्थिव शरीर रविवार सुबह दिल्ली से गुवाहाटी लाया गया। जब काफिला गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से काहिलीपारी स्थित उनके घर के लिए रवाना हुआ, अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में फैंस की भीड़ देखने को मिली। सड़को पर फूल बरसाए गए और लोग 'जुबीन दा अमर रहें' के नारे लगाएं। Read More: Kareena Kapoor 45th Birthday: करीना कपूर का 45वां जन्मदिन आज, जानिए उनसे जुड़ी खास बातें…

पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में निकाली गई अंतिम यात्रा...

असम पुलिस के DGP और पुलिस कमिश्नर पार्थसारथी खुद एम्बुलेंस के आगे चल रहे थे ताकि भीड़ के बीच का रास्ता साफ रहे। और हजारों की तदात में आएं फैंस को कंट्रोल किया जा सके।

ताबूत से लिपटकर रोईं पत्नी गरिमा...

इस दौरान जुबीन की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग जिस ताबूत में पति जुबीन दा का पार्थिव शरीर था उससे लिपटकर रोने लगी। सिंगर के पार्थिव शरीर को फूलों से सजी एम्बुलेंस में रखा गया था। काफिले में जुबीन की फेवरेट ओपन जीप भी शामिल थी, जिस पर उनका बड़ा पोर्ट्रेट लगाया गया।

कैसे हुई मौत? पत्नी ने बताई सच्चाई...

मशहूर सिंगर जुबीन दा का निधन 19 सितंबर को सिंगापुर में हुआ। कई लोगों ने पहले दावा किया था कि उनकी मौत स्कूबा डाइविंग हादसे में हुई, लेकिन उनकी पत्नी गरिमा ने साफ किया कि सिंगर की मौत दौरा पड़ने से हुई।

पहले भी पड़ चुके हैं दौरे- जुबीन

गरिमा ने कहा कि- 'जुबीन को पहले भी कई बार दौरे आ चुके थे। एक बार सिंगापुर में ही उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में ICU में भर्ती कराना पड़ा था, जिससे उनकी जान बचाई गई थी।'

पत्नी की अपील...

सिंगर के निधन के बाद उनके मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा और इवेंट मैनेजर के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई। इसके बाद गरिमा ने सिंगर के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से रोते हुए एक वीडियो जारी कर लोगों से शिकायत वापस लेने की अपील की।

जुबीन का संगीतमय सफर...

जुबीन का जन्म 18 नवंबर 1972 को असम के तिनसुकिया में हुआ था। वे गायक, संगीतकार, गीतकार, अभिनेता और निर्देशक रहे। उन्होंने असमिया, हिंदी, बांग्ला, अंग्रेजी सहित 40 भाषाओं और बोलियों में 38 हजार से ज्यादा गाने गाए।

असम का गर्व..

जुबीन गर्ग न केवल असमिया बल्कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के भी हाईएस्ट पेड सिंगर थे। उनकी लोकप्रियता ने उन्हें पूर्वोत्तर भारत का सांस्कृतिक प्रतीक बना दिया था।

कई लोगों ने दी श्रद्धांजलि...