yasin machhli case: भोपाल के चर्चित गैंगस्टर यासीन अहमद उर्फ मछली के परिवार से जुड़े 9 लोगों को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने मंगलवार को इन लोगों के फ्रीज किए गए बैंक खातों को डी-फ्रीज करने का आदेश दिया है। साथ ही राज्य सरकार से उनके घरों को ढहाने की कार्रवाई पर विस्तृत जवाब भी मांगा गया है।
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कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने यह स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ताओं पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, तो उनके बैंक खातों को सीज करना अनुचित है। कोर्ट ने निर्देश दिए कि बैंक खाते डी-फ्रीज किए जाएं और RBI नियमों के तहत ही लेनदेन हो, यानी कैश विड्रॉल तय सीमा से अधिक न हो।
yasin machhli case: पुलिस कार्रवाई के लिए स्वतंत्र, पर कानून के दायरे में
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पुलिस जांच में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई आपत्तिजनक साक्ष्य मिलते हैं, तो पुलिस को कानून के तहत उचित कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता होगी।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
साजिदा बी समेत 9 याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके घर बिना किसी वैध नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के तोड़ दिए, उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए और ईमेल तक ब्लॉक कर दिए गए। उन्होंने बताया कि उनका नाम किसी FIR में नहीं है, न ही कोई आपराधिक जांच उनके खिलाफ चल रही है।
yasin machhli case: अधिकारियों का जवाब
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26 सितंबर की सुनवाई के दौरान भोपाल कलेक्टर और डीसीपी क्राइम ब्रांच ने कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर यह स्वीकार किया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है। हालांकि, यासीन के खाते से याचिकाकर्ताओं के खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर हुई है, जिसकी जांच अभी लंबित है।
संपत्ति तोड़ने पर सवाल
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि प्रशासन ने 21 अगस्त 2025 को संपत्ति ध्वस्त करने की कार्रवाई की, लेकिन उन्हें कोई कानूनी नोटिस नहीं दिया गया। यह संविधान के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है। उनका दावा है कि वे अन्य सरकारी जमीन पर रहने वाले लोगों की तरह ही रह रहे हैं, फिर भी केवल उन्हें टारगेट किया गया।