Student dies after falling into ditch in Maheshwar: एक मां से कहता उनका बच्चा.. मां मुझे थार दिला दो.. और उसके कुछ ही मिनटों में पता चले की उस मां का बेटा खाई में गिर गया हो. तो सोचिए उस बेबस मां पर क्या बीत रही होगी.
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6 बजे एक मां के पास उसके बेटे का फोन[/caption]
घटना है महेश्वर की जहा सुबह 6 बजे एक मां के पास उसके बेटे का फोन आया और बेटे ने कहा की मां मुझे थार चाहिए.और 10 मिनट बाद पता चला की बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा.
अब सुनिए मृतक की बहन ने क्या कहा..
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6 बजे एक मां के पास उसके बेटे का फोन[/caption]
सुबह करीब 6 बजे मम्मी के पास भैया का फोन आया। वह कह रहा था, कल असाइनमेंट जमा करने जाऊंगा. मां और भाई की बातें सुनकर मेरी भी नींद खुल गई. भैया मां से कह रहे थे कि मुझे थार दिला दो.
इसके 10 मिनट बाद वह खाई में गिर गया..
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10 मिनट बाद वह खाई में गिर गया[/caption]
बता दें की सुजल मंगलवार सुबह मंडलेश्वर के जामगेट की दो हजार फीट गहरी खाई में गिर गया था। इससे पहले, रातभर दोस्तों के साथ पार्टी की।
प्राइवेट कॉलेज में एमटेक का छात्र था
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10 मिनट बाद वह खाई में गिर गया[/caption]
सुबह दोस्त की थार लेकर घूमने के लिए जामगेट पहुंच गया. करीब 6 घंटे बाद खाई में उतर कर शव को ऊपर लाया जा सका. सुजल इंदौर के प्राइवेट कॉलेज में एमटेक का छात्र था.
पिता बोले- एक दिन पहले ही इंदौर गया था
कंपकंपाती आवाज में सुजल के पिता मड़ेसिंह ने कहा, मैं सरकारी स्कूल में टीचर हूं। दो बेटे और दो बेटियां हैं। सुजल सबसे छोटा था। इंदौर के इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक कर रहा था. अब मैं क्या कहूं. सब कुछ खत्म सा हो गया है.
वहीं मां संगीता अपने बेटे से हुई बात का समय मोबाइल में देख रही हैं. और उनका चेहरा पथरा सा गया है. कुछ कह नहीं पा रही. पर सही से बात तक नहीं कर पा रहीं.
फाइल खरीदने के पैसे दिए थे
जैसे-तैसे पूछने पर वे कहती हैं, उसको तो मैंने असाइनमेंट के लिए फाइल खरीदने के पैसे दिए थे। मेरे भाई का लड़का भी उसके साथ था। आज से पहले उसने कभी कार की बात नहीं की।
वो अपने दोस्त के साथ थार से ही गया था, इसलिए शायद उसने थार लेने के बात कही।
दोस्त बोला- उसे बचाने के लिए मैंने छलांग लगाई
वहीं घटना के वक्त मौजूद दोस्त सुजल का दोस्त लोकेश सिंह ने कहा की मैं सुजल को बचाने की कोशिश में गिर गया था. उसे भी चोट आई है.
बात करते हुए लोकेश के पैर कांप रहे हैं. वह कहता है, बंदर को बिस्किट खिलाते वक्त सुजल का पैर फिसल गया. नीचे गिरता देख मैंने उसे बचाने के लिए छंलाग लगाई।
लेकिन, 20 फीट की गहराई पर जाकर अटक गया.
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10 मिनट बाद वह खाई में गिर गया[/caption]
मेरी चीख निकल गई। आवाज सुनकर विजय मुजाल्दा और मंसाराम सोलंकी आए। दोनों ने सुजल के बारे में पूछा। मेरी तो आवाज ही नहीं निकल रही थी। इशारे से सुजल के बारे में बताया।
इसके बाद पुलिस मुझे बड़गोंदा अस्पताल लेकर आई.
लोकेश ने बताया कि रात में पार्टी की थी। पहले सभी ने मिलकर चिकन और रोटियां बनाईं. फिर रात 11 बजे से पार्टी शुरू हुई. देर रात 3 बजे के करीब खाना खाया.
इसके बाद सुजल ने कहा कि.. घूमने जाना है। कार का इंतजाम करो। मैंने अपने दोस्त विजय मुजाल्दा को रूम पर बुलाया. यहां से उसकी थार लेकर सुबह करीब 4 बजे निकल पड़े।
सुबह करीब 6 बजे जाम रोड पहुंच गए।
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जाम गेट[/caption]
जाम गेट से सुजल ने अपनी मम्मी से फोन पर बात की। वो मां से कह रहा था कि 1 जनवरी को थार लूंगा.
मां से बात करने के बाद गेट के पास की दुकान पर सुजल ने तीन प्लेट मैगी ऑर्डर की. सुजल ने बंदरों को खिलाने के लिए दो पैकेट बिस्किट के लिए. बिस्किट और मैगी की प्लेट लेकर हम बंदरों के पास चले गए.
मंसाराम और विजय अपनी प्लेट लिए पीछे आ रहे थे।
बात करते-करते सुजल पहाड़ी के नजदीक से बंदरों को बिस्किट डालने लगा. मंसाराम और विजय पीछे ही रुक गए. मैंने उसे गिरते देखा, उसे बचाने मैं भी कूद गया. लेकिन उसे बचा नहीं पाए..
मंसाराम बोले- समझ ही नहीं आया, क्या करें
Student dies after falling into ditch in Maheshwar: घटनास्थल पर ही सुजल के साथ गए दोस्त मंशाराम मिले. मंशाराम इंदौर जिला कोर्ट में एडवोकेट हैं. बात करते हुए उनकी जुबान लड़खड़ा रही है.आगे-आगे चल रहे सुजल और लोकेश दिखाई नहीं दिए।
कुछ समझ नहीं आ रहा था. हमें लोकेश की आवाज आई। उसको नीचे से ऊपर लेकर आए, फिर पुलिस को फोन लगाया.
6 घंटे लगे लाश ऊपर लाने में
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6 घंटे बाद लाश उपर आई[/caption]
बता दें की जाम गेट के सुरक्षा कर्मी जितेंद्र बारिया पटेल बताते हैं कि.. मेरे पास सुबह 6:15 बजे फोन आया था. वो करीब 2000 फीट नीचे गिरा था। नीचे जाने में ही दो ढाई घंटे का समय लग जाता है.
नीचे चट्टानों वाला घना जंगल है. खाई और नदी भी है.
जब हम नीचे पहुंचे तो सुजल की सांस चल रही थी. हमने उसका शरीर हिलाया. इसी दौरान सांस थम गई. फिर हम उसे तीन घंटे में ऊपर लेकर आए. उसे मंडलेश्वर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया,
जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
जहां हादसा हुआ, वहां फेंसिंग नहीं
जाम गेट जनपद पंचायत महेश्वर की ग्राम पंचायत बागदरा के अधीन आता है। यह इलाका खतरनाक पत्थरों और गहरी खाई के लिए जाना जाता है. यहां न तो कोई सुरक्षा गार्ड है और न ही जानलेवा खाई के किनारे फेंसिंग.
हलचल पर आसानी से नजर रख सकते थे
Student dies after falling into ditch in Maheshwar: बता दें की इसे एक चेक पॉइंट के तौर पर बनाया गया था। यहीं से सेनाओं का आना-जाना होता था. इस दरवाजे पर खड़े होकर सैनिक निमाड़ में पहाड़ी की तराई में होने वाली हलचल पर आसानी से नजर रख सकते थे.