उत्तर प्रदेश

महोबा में कर्ज और बेटे की मौत ने तोड़ा हौसला: आत्महत्या की कोशिश

Mahoba suicide attempt: उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद के कुलपहाड़ कस्बे में रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले 55 वर्षीय माहिल की जिंदगी कर्ज, बेरोजगारी और पारिवारिक त्रासदी के बोझ तले बिखर गई। शनिवार को, साहूकारों की धमकियों और आर्थिक तंगी से तंग आकर माहिल ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या की कोशिश की। परिजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले गए, जहां उनका इलाज चल रहा है। 

बेटे की असमय मौत 

माहिल के जीवन में सबसे बड़ा आघात पिछले साल तब लगा, जब उनके 10 वर्षीय बेटे छोटू की आकाशीय बिजली की चपेट में आकर मृत्यु हो गई। छोटू की मासूम मुस्कान और भोली बातें माहिल के लिए जीवन का सहारा थीं। उस हादसे ने माहिल को भावनात्मक रूप से तोड़ दिया। छोटू की यादें अब उनकी जिंदगी की धुंधली गलियों में खो गई हैं। इस दुख ने माहिल को अंदर से खोखला कर दिया, और परिवार का भविष्य उनके लिए और भी बोझिल हो गया। [caption id="attachment_102536" align="alignnone" width="484"] माहिल[/caption]

Mahoba suicide attempt: कर्ज और साहूकारों का दबाव 

माहिल ने अपनी तीन बेटियों—मीना, बिट्टू और फुल्ला—की शादी के लिए साहूकारों से करीब 6 लाख रुपये का कर्ज लिया था। मजदूरी की अनियमित आय के कारण वह इस राशि को चुकाने में असमर्थ रहे। साहूकार रोज उनके दरवाजे पर दस्तक देते, वसूली के लिए धमकियां देते और अपमानजनक व्यवहार करते। माहिल हर बार उन्हें समझाने की कोशिश करते, लेकिन साहूकारों का सख्त रवैया उनकी उम्मीदों को कुचलता गया। कर्ज का बोझ और लगातार अपमान ने माहिल को मानसिक रूप से कमजोर कर दिया, जिसके चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।

जिम्मेदारियां बढ़ा रही थीं दबाव

माहिल के परिवार में नौ संतानें हैं। उनकी सबसे छोटी बेटी सोनिया, जो केवल पांच साल की है, और नाबालिग बेटों—जागेश, सोनू और जावेद—की परवरिश की चिंता उन्हें हर पल सताती थी। सोनिया की शादी का विचार भी उनके मन पर भारी बोझ था। मजदूरी न मिलने के कारण परिवार की मूलभूत जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया था। माहिल की मेहनत और ईमानदारी के बावजूद, बेरोजगारी और आर्थिक तंगी ने उन्हें हर मोर्चे पर हार का सामना कराया। भरत त्रिपाठी की रिपोर्ट