उत्तराखंड

हरिद्वार में डॉक्टर की लापरवाही से युवक की मौत, अस्पताल सील

Doctor Negligence Haridwar: हरिद्वार के ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र में न्यू हरिद्वार कॉलोनी में एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर की गंभीर लापरवाही के कारण एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक युवक सिडकुल में स्थित हिंदुस्तान लीवर कंपनी में कर्मचारी था। इस घटना ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया और मृतक के परिजनों के साथ-साथ कंपनी के कर्मचारियों ने अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया। परिजनों का आरोप है कि हाथ के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने गलत इंजेक्शन लगाया, जिसके कारण युवक की जान चली गई।

[caption id="attachment_103616" align="alignnone" width="468"] डॉक्टर ने गलत इंजेक्शन लगाया[/caption]

डॉ. की लापरवाही, परिजनों ने की मारपीट

युवक की मौत की खबर फैलते ही मृतक के परिजन और हिंदुस्तान लीवर कंपनी के कर्मचारी डॉक्टर के घर के बाहर इकट्ठा हो गए। गुस्साए लोगों ने जमकर हंगामा किया और डॉक्टर तथा उनके सहयोगी के साथ मारपीट की। परिजनों का कहना था कि डॉक्टर की लापरवाही और गलत इलाज के कारण एक युवा कर्मचारी की जान चली गई। इस हंगामे के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद पुलिस को मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित करना पड़ा।  [caption id="attachment_103615" align="alignnone" width="456"] हरिद्वार में डॉक्टर की लापरवाही से युवक की मौत[/caption]

अवैध रूप से अस्पताल संचालित

घटना की सूचना मिलते ही ज्वालापुर कोतवाली पुलिस और सिटी मजिस्ट्रेट मनीष सिंह मौके पर पहुंचे। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि जांच में पाया गया कि घर में अवैध रूप से अस्पताल संचालित किया जा रहा था। इसके तत्काल बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए अस्पताल को सील कर दिया। मनीष सिंह ने मृतक के परिजनों को भरोसा दिलाया कि इस मामले की गहन जांच की जाएगी और दोषी डॉक्टर के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई को स्थानीय लोगों ने सराहा, लेकिन साथ ही चिकित्सा क्षेत्र में और सख्ती की मांग भी उठने लगी।

Doctor Negligence Haridwar: चिकित्सा लापरवाही पर सवाल

यह घटना एक बार फिर निजी अस्पतालों में चिकित्सा लापरवाही और अवैध संचालन के मुद्दों को सामने लाती है। सिटी मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और सरकार के सामने निजी चिकित्सा संस्थानों के नियमन और निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता को उजागर किया है। मृतक के परिवार ने न्याय की मांग की है और प्रशासन ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने का वादा किया है।