मध्य प्रदेश

एम्स की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा ने मौत को गले लगा लिया

Assistant Professor Dr. Rashmi Verma: भोपाल एम्स के इमरजेंसी एवं ट्रॉमा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा ने मौत को गले लगा लिया है. 24 दिन तक रश्मि मौत और जिंदगी जंग लड़ रही थी.. लेकिन जिंगदी की जंग हार गई.

[caption id="attachment_126632" align="alignnone" width="300"] असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा[/caption]

बता दें की 11 दिसंबर को डॉ रश्मि ने आत्महत्या का प्रयास किया.. और उसी के बाद एम्स के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं. तमाम कोशिशों, विशेषज्ञों की निगरानी और इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी.

एम्स के अनुसार, 5 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे डॉ. रश्मि वर्मा ने अंतिम सांस ली.

[caption id="attachment_126633" align="alignnone" width="300"] डॉ. रश्मि वर्मा[/caption]

उनका शव परिजनों को सौंप दिया गया. डॉ. रश्मि वर्मा ने बेहोशी की दवा का हाई डोज लिया था. उनके पति ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन शाक्य उन्हें बेहोशी की हालत में एम्स लेकर पहुंचे थे.

Assistant Professor Dr. Rashmi Verma: 7 मिनट तक रुकी थी दिल की धड़कन

एम्स पहुंचने से पहले 25 मिनट का टाइम निकल चुका था. डॉक्टरों के अनुसार डॉ. रश्मि का दिल लगभग 7 मिनट के लिए धड़कना बंद कर चुका था.

इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत सीपीआर शुरू किया और तीन बार रेससिटेशन के बाद उनकी हार्टबीट वापस लाई जा सकी थी. ।

बता दें की डॉ. रश्मि वर्मा 24 दिनों से एम्स के मेन आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं. हर दिन उम्मीद की किरण तलाशने की कोशिश की गई, लेकिन ब्रेन डैमेज इतना गंभीर था कि सुधार नहीं हो सका.

Assistant Professor Dr. Rashmi Verma:  कौन थी डॉ. रश्मि वर्मा

[caption id="attachment_126635" align="alignnone" width="300"] डॉ. रश्मि वर्मा[/caption]

डॉ. रश्मि वर्मा ने प्रयागराज के एमएलएन मेडिकल कॉलेज से MBBS और BRD मेडिकल कॉलेज गोरखपुर से एमडी किया था. वे एम्स भोपाल के अलावा एलएन मेडिकल कॉलेज और पीएमएस भोपाल में भी सेवाएं दे चुकी थीं.

साथ ही उन्हे 5 साल का टीचिंग अनुभव था. डॉ. रश्मि गरीब मरीजों की मदद के लिए जानी जाती थीं और कई बार इलाज का खर्च भी खुद उठाती थीं.

घटना के बाद हुई थी आपात बैठक

डॉ. रश्मि की मौत के बाद एम्स के भीतर के कथित टॉक्सिक वर्क कल्चर, प्रशासनिक दबाव और नोटिस सिस्टम को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं.

घटना के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स प्रबंधन की आपात बैठक हुई थी, जिसमें ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के एचओडी को हटाने और विभाग को दो हिस्सों में बांटने जैसे बड़े फैसले लिए गए थे.

इस पूरे मामले की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित भी की गई थी, जिसकी अब तक रिपोर्ट सामने नहीं आई है.