Ambulance negligence: मरीजों की जान से जुड़ी संवेदनशील सेवाओं में लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। SECL सोहागपुर सेंट्रल अस्पताल से जिला अस्पताल शहडोल ले जाई जा रही एंबुलेंस बीच रास्ते में उस समय बंद हो गई जब उसका डीजल खत्म हो गया। इस घटना के कारण मरीज और उसके परिजन घंटों तक परेशान होते रहे और सड़क किनारे मदद का इंतजार करते रहे।
[caption id="attachment_109717" align="alignnone" width="300"] Ambulance negligence[/caption]
समय पर कोई मदद नहीं मिल सकी
Ambulance negligence: जानकारी के अनुसार, अस्पताल की यह एंबुलेंस दित्या इंटरप्राइजेज नामक निजी कंपनी के संचालन में है। आरोप है कि कंपनी द्वारा वाहन में पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं भरवाया गया था, जिसके कारण एंबुलेंस शहडोल मार्ग पर अचानक रुक गई। वाहन के रुकते ही मरीज की तबीयत और ज्यादा बिगड़ने लगी और परिजन घबराकर इधर-उधर मदद के लिए दौड़ने लगे। वहीं एंबुलेंस चालक भी मोबाइल पर सहायता मांगने की कोशिश करता रहा, लेकिन समय पर कोई मदद नहीं मिल सकी।
एंबुलेंस को दोबारा चालू किया गया
करीब एक घंटे तक एंबुलेंस सड़क पर ही खड़ी रही और इस दौरान न तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई सहायता मिली और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने स्थिति की गंभीरता को समझा। आखिरकार परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह डीजल का इंतजाम कर एंबुलेंस को दोबारा चालू किया गया।
गंभीर लापरवाही और प्रशासन से जांच की मांग
Ambulance negligence: इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और अस्पताल कर्मचारियों ने गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यदि समय पर मरीज को इलाज नहीं मिला होता, तो उसकी जान भी जा सकती थी। यह घटना न केवल SECL अस्पताल की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि ठेकेदार दित्या इंटरप्राइजेज की गैरजिम्मेदार कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।
दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए
लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और एंबुलेंस सेवा में हो रही ऐसी लापरवाहियों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में मरीजों की जान जोखिम में न पड़े। यह मामला मानवता को झकझोरने वाला है और इसके दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।