₹5-10 हजार में तैयार होती थीं 10वीं-12वीं की फर्जी मार्कशीट, दिल्ली पुलिस ने किया बड़े रैकेट का भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस ने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शाहदरा जिला स्पेशल स्टाफ की कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से 10वीं और 12वीं की फर्जी मार्कशीट, लैपटॉप, प्रिंटर तथा दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह लंबे समय से नकली शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार कर बेच रहा था। आरोपियों ने कथित तौर पर अब तक करीब 100 से 150 लोगों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए और प्रत्येक मार्कशीट या प्रमाणपत्र के लिए 5 हजार से 10 हजार रुपये तक वसूले। पुलिस के अनुसार इन दस्तावेजों का इस्तेमाल नौकरी, कॉलेज में दाखिले और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं के लिए किया जाता था।
डिकॉय ग्राहक बनाकर पुलिस ने खोली फर्जीवाड़े की परतें
पुलिस के मुताबिक, 30 जून 2026 को शाहदरा जिला स्पेशल स्टाफ को सूचना मिली थी कि शाहदरा निवासी नवनीत त्यागी फर्जी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट तैयार कर लोगों को उपलब्ध करा रहा है। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर आशीष कुमार के नेतृत्व में टीम ने जांच शुरू की।
आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस ने एक कर्मचारी को डिकॉय ग्राहक बनाया। कर्मचारी की फोटो, 10वीं की मार्कशीट और आधार कार्ड की प्रति व्हाट्सएप के माध्यम से आरोपी को भेजी गई, ताकि वह फर्जी 12वीं की मार्कशीट तैयार कर सके। इसी दौरान पुलिस को पर्याप्त साक्ष्य मिले, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की गई।
छापेमारी में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, दो साथी भी दबोचे गए
17 जुलाई 2026 को पुलिस ने जीटी रोड स्थित मिराज सिनेमा और विकास मॉल के पास छापेमारी कर मुख्य आरोपी नवनीत त्यागी को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 10वीं और 12वीं की दो फर्जी मार्कशीट बरामद हुईं। इसके बाद शाहदरा थाने में मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया गया।
पूछताछ में नवनीत त्यागी ने अपने दो सहयोगियों सबाब आलम और फरीद अहमद सैफी के नाम बताए। पुलिस ने दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से एक लैपटॉप, प्रिंटर और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण बरामद किए गए।
बंद हो चुके संस्थान के रजिस्ट्रेशन का किया जा रहा था दुरुपयोग
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी एक बंद हो चुके शैक्षणिक संस्थान के एक्सपायर्ड रजिस्ट्रेशन का इस्तेमाल कर रहे थे। वे उसी संस्थान के नाम पर पुरानी तारीखों के साथ फर्जी मार्कशीट और प्रमाणपत्र तैयार करते थे, ताकि दस्तावेज असली प्रतीत हों।
पुलिस के अनुसार यह एक सुनियोजित फर्जीवाड़ा था, जिसके जरिए नौकरी, शैक्षणिक प्रवेश और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में उपयोग के लिए नकली दस्तावेज तैयार कर लोगों और संस्थानों को गुमराह किया जा रहा था।
गिरोह के नेटवर्क की जांच जारी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 53 वर्षीय नवनीत त्यागी (ईस्ट रोहताश नगर, शाहदरा), 41 वर्षीय सबाब आलम (राजनगर एक्सटेंशन, गाजियाबाद) और 49 वर्षीय फरीद अहमद सैफी (विजय पार्क, मौजपुर, दिल्ली) के रूप में हुई है।
दिल्ली पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी मार्कशीट हासिल करने वाले लोग कौन हैं, इन दस्तावेजों का कहां-कहां इस्तेमाल किया गया और इस रैकेट से जुड़े अन्य सदस्य कौन हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आगे भी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।