छत्तीसगढ़

Nankiram Kanwar: पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार का लगाया आरोप, पीएम और सीएम को लिखा पत्र

Nankiram Kanwar: छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने दर्री डेम से बालको परसाभाटा तक सड़क निर्माण की स्वीकृति को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कोयला व खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्य खनिज संसाधन विभाग के संचालक को पत्र लिखकर शिकायत की है।

[caption id="attachment_98218" align="alignnone" width="245"] Nankiram Kanwar[/caption]

Nankiram Kanwar: फैसले को गलत और निजी कंपनी के हित में बताया

ननकीराम कंवर का आरोप है कि यह सड़क निर्माण कार्य जिला खनिज न्यास (DMF) मद से मंजूर किया गया है, जिसका उद्देश्य बाल्को कंपनी को लाभ पहुंचाना और सार्वजनिक निधियों का दुरुपयोग करना है। उन्होंने इस फैसले को गलत और निजी कंपनी के हित में बताया है।

Nankiram Kanwar: निजी संस्थानों को फायदा पहुंचाने के लिए

Nankiram Kanwar: पूर्व मंत्री का कहना है कि इस परियोजना के लिए बाल्को कंपनी से ही राशि प्राप्त कर सड़क निर्माण कराया जाना चाहिए, न कि जनता के लिए बनाए गए खनिज न्यास कोष का उपयोग करके। उनका यह भी कहना है कि खनिज न्यास कोष का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाओं और जनकल्याण के लिए होना चाहिए, न कि निजी संस्थानों को फायदा पहुंचाने के लिए।

Nankiram Kanwar: सार्वजनिक धन का दुरुपयोग नहीं किया गया था

अपने पत्र में कंवर ने यह भी उल्लेख किया है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उन्होंने व जयसिंह अग्रवाल ने एसईसीएल जैसी कंपनियों से फंडिंग कराकर कई सड़कों का निर्माण करवाया था। उस समय सार्वजनिक धन का दुरुपयोग नहीं किया गया था।

Nankiram Kanwar: यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा

ननकीराम कंवर ने मांग की है कि दर्री डेम से बालको परसाभाटा तक प्रस्तावित सड़क निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाए और बाल्को से ही इस कार्य के लिए राशि लेकर आगे की कार्रवाई की जाए। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस तरह की स्वीकृति से पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं और यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा है।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कंवर की यह चिट्ठी राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।