Mohan Bhagwat: बिलासपुर में आयोजित एक भावनात्मक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत और छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पूर्व संघचालक काशीनाथ गोरे को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम सिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया, जहां काशीनाथ गोरे की स्मृति में तैयार की गई स्मारिका का विमोचन किया गया।
[caption id="attachment_102609" align="alignnone" width="300"]Mohan Bhagwat: इसे अपने जीवन का टर्निंग पॉइंट मानते हैं
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की तस्वीर पर पुष्पांजलि और नमन के साथ हुई। इसके बाद डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में काशीनाथ गोरे से जुड़ा एक प्रेरणादायक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि डॉक्टर बनने के बाद एक बार गोरे जी उन्हें देवार मोहल्ला ले गए, जहां असुविधाजनक माहौल के बावजूद वहां की बच्चियों ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया। इस घटना ने उनके जीवन को नई दिशा दी और वे इसे अपने जीवन का टर्निंग पॉइंट मानते हैं।
Mohan Bhagwat: कुटुंबकम" के मूल विचार को सिद्ध करता
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस अवसर पर काशीनाथ गोरे को सच्चा लोकहितकारी स्वयंसेवक बताते हुए कहा कि वे जीवनभर समाजसेवा में जुटे रहे। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक सबसे पहले अपने घर, फिर पड़ोस और अंततः पूरे देश के लिए काम करता है। यही सेवा-भाव "वसुधैव कुटुंबकम" के मूल विचार को सिद्ध करता है, जो संघ का मूल मंत्र है।
Mohan Bhagwat: लगातार प्रगति की दिशा में कार्य करते रहेंगे
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति काशीनाथ गोरे नहीं बन सकता, लेकिन हर किसी में स्वयंसेवक बनने का भाव होना चाहिए। उन्होंने अपने भाषण में यह भी उल्लेख किया कि लोग अक्सर सोचते हैं कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महापुरुष नहीं बन सकते और अगर कोई बने भी, तो वह पड़ोसी के घर में हो, अपने घर में नहीं। भागवत ने कहा कि समाज में बदलाव तभी आएगा जब हम स्वयं बेहतर इंसान बनने की कोशिश करेंगे, अपने परिवार और समाज को खुश रखेंगे और लगातार प्रगति की दिशा में कार्य करते रहेंगे।
इस कार्यक्रम के माध्यम से काशीनाथ गोरे के योगदान को स्मरण किया गया और समाजसेवा की प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।