छत्तीसगढ़ महिला आयोग ने सुनी महिला उत्पीड़न के प्रकरण
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक ने आज आयोग के रायपुर कार्यालय में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की. प्रदेश स्तर पर 397वीं व रायपुर जिले में 186वीं हुई जनसुनवाई में पांच प्रकरणों की सुनवाई हुई, जिनमें से कुछ प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया.सुनवाई के दौरान एक प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि अनावेदक गरियाबंद जिला में नगर सैनिक के तौर पर पदस्थ है. उसने आवेदिका को धोखा देकर विधिवत शादी की.
समाप्ति के पर्याप्त आधार
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका को तलाक दिए बगैर उसके पति ने दूसरी महिला से विवाह कर लिया है, जिससे लगभग 4 वर्ष का एक बेटा भी है. और आवेदिका से उसकी एक बेटी है. अनावेदक शासकीय सेवा में होते हुए सिविल सर्विसेस रूल्स का उल्लंघन कर रहा है. इस आधार पर अनावेदक के शासकीय नौकरी से सेवा की समाप्ति के पर्याप्त आधार है.
एफआईआर दर्ज कराने का आधार रखती
आवेदिका के पति 5 भाई थे. करोड़ों की संपत्ति पर आवेदिका के ससुर व शेष 4 भाई ने मिलकर कब्जा कर रखा है, तथा आवेदिका व उसकी बेटी को भरण-पोषण व संपत्ति में हिस्सा नहीं दे रहे है. आयोग ने कहा कि ऐसी दशा में आवेदिका अनावेदकगणों के खिलाफ मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना का एफआईआर दर्ज कराने का आधार रखती है.
भरण-पोषण भी नहीं दे रहे
आवेदिका के पति के नाम के मकान में अनावेदकगणों ने कब्जा कर रखा है. आवेदिका को समझाइश दिया गया कि वह नगर निगम फौती के आधार पर अपना व अपनी बेटी का नाम वह दर्ज करवा सकती है. पिछली सुनवाई मे अनावेदकगणों ने आवेदिका को 30 हजार रुपए महीना देने का प्रस्ताव रखा था, जिसका पालन अनावेदकगणों ने आज तक नही किया व भरण-पोषण भी नहीं दे रहे है.
अगली अनुशंसा की जाएगी
आयोग ने कहा कि आवेदिका सभी अनावेदकगणों के खिलाफ थाना- तेलीबांधा व महिला थाना में एफआईआर का अधिकार सुरक्षित रखती है. अनावेदकगणों ने पिछला भरण-पोषण 50-50 हजार रुपए का चेक कुल 2 लाख रुपए आवेदिका को देने सहमत हुए तत्पश्चात् कार्रवाई में अगली अनुशंसा की जाएगी.
निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया
अनावेदक आवेदिका का पूरा खर्च वहन करता है और बेटी का भी खर्च वहन करता है. ऐसी दशा में आयोग द्वारा उभय पक्षों को समझाइश दिया गया कि दोनों अपने संबंधों को सुधारने का प्रयास करे और साथ में रहे. आयोग ने कहा कि यदि अनावेदक आवेदिका को दुबारा तंग करता है, तो वह अनावेदक के विरुद्ध थाने में एफआईआर दर्ज करा सकती है. इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया .