बलरामपुर बांध हादसे में 5 की मौत, 2 लापता
छत्तीसगढ़ में मानसून ने इस बार जबरदस्त तबाही मचाई है। राज्य में लगातार हो रही बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। कोरबा जिले का मिनीमाता बांगो डैम लबालब हो चुका है। जलस्तर 358.10 मीटर तक पहुंच जाने के बाद बांध प्रबंधन ने एहतियातन
8 गेट खोल दिए। इसके चलते हसदेव नदी में लगभग
49,904 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। अचानक छोड़े गए पानी से आसपास के
32 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
बलरामपुर बांध हादसे ने बढ़ाई चिंता
लगातार बारिश ने बलरामपुर जिले में बड़ा हादसा करा दिया।
लुत्ती बांध मंगलवार देर रात टूट गया। इसकी चपेट में आने से निचले इलाके के
चार घर बह गए। अब तक
5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि 2 लोग अब भी लापता हैं। मृतकों में एक 6 साल का बच्चा भी शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे से पहले बांध की मरम्मत की मांग की गई थी, लेकिन लापरवाही के कारण यह त्रासदी हुई।
दुर्ग, सरगुजा में भारी बारिश का अलर्ट
पिछले 24 घंटे में प्रदेश के अधिकतर जगहों पर मध्यम बारिश हुई है। बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभाग के कुछ जगहों पर भारी बारिश हुई है। उत्तरी हिस्से में लो प्रेशर एरिया बने रहने के प्रभाव से ठीक-ठाक बारिश होने की संभावना है। वहीं बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा के एक दो स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।इससे पहले कोरबा में लगातार बारिश से निचले इलाके में जलभराव हो गया। मानिकपुर, रविशंकर नगर, सीतामढ़ी और खरमोर इलाके के घरों में पानी घुस गया। सड़कों पर घुटनों तक पानी भरा रहा।
बस्तर में 200 मकान ढहे, हजारों प्रभावित
बारिश से सबसे ज्यादा असर
बस्तर संभाग पर पड़ा है। दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर जिलों में
200 से ज्यादा मकान ढह गए। अब तक
2196 लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है। स्कूलों और आश्रमों में अस्थायी कैंप बनाए गए हैं। बारसूर इलाके में
स्टेट हाईवे-5 का पुल टूट गया है। लोग रस्सियों और सीढ़ियों के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं
क्या है लो प्रेशर एरिया?
जहां हवा का दबाव आसपास की जगहों से कम होता है, उसे
लो प्रेशर एरिया कहते हैं। यहां गर्म हवा ऊपर उठती है, जिससे नीचे दबाव कम हो जाता है और आसपास की ठंडी हवा खिंचकर आती है। इससे
बादल बनते हैं और बारिश होती है। यही सिस्टम कई बार
डीप डिप्रेशन या
साइक्लोन में बदलकर तबाही मचा देता है। भारत में मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले लो प्रेशर एरिया ही देशभर में भारी बारिश का कारण बनते हैं।
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