7 दिन ‘डिजिटल अरेस्ट’, रिटायर्ड प्रोफेसर से 1.4 करोड़ की ठगी
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर ठगों ने रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को 7 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए ठग लिए। ठगों ने खुद को पुलिस और ईडी अधिकारी बताकर महिला को टेरर फंडिंग केस में फंसाने का डर दिखाया। इतना ही नहीं, बेटे और पोते को जेल भेजने की धमकी देकर मानसिक दबाव बनाया गया।82 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर प्रो. रमन श्रीवास्तव को 20 अप्रैल को व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को “संजय PSI” बताया और कहा कि उनके नाम से PFI को फंडिंग हो रही है। इसके बाद उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रखा गया और घर से बाहर निकलने तक से मना कर दिया गया।
फर्जी ED नोटिस और सुप्रीम कोर्ट वारंट भेजे
ठगों ने महिला को फर्जी बैंक स्टेटमेंट, डेबिट कार्ड डिटेल और सुप्रीम कोर्ट के नकली वारंट भेजे। कहा गया कि अगर किसी को बताया तो बेटे और पोते को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डर के कारण महिला ने एक सप्ताह तक किसी से संपर्क नहीं किया और अलग-अलग तारीखों में चार बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करती रहीं।21 से 24 अप्रैल के बीच महिला ने कुल 1.04 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी ठगों ने 50 लाख रुपए और मांगे।
बेटे को कॉल करते ही खुला पूरा मामला
जब बैंक अकाउंट खाली हो गया तो महिला ने मुंबई में रहने वाले बेटे को कॉल कर कहा “50 लाख भेज दो, नहीं तो मैं जेल चली जाऊंगी।” बेटे को शक हुआ और वह तुरंत फ्लाइट से बिलासपुर पहुंचा। पूछताछ के बाद डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी का खुलासा हुआ।
बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर
पुलिस के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ठग खासतौर पर बुजुर्ग, रिटायर्ड कर्मचारी और कारोबारी लोगों को निशाना बना रहे हैं। बिलासपुर और रायपुर में हाल के महीनों में करोड़ों रुपए की कई साइबर ठगी सामने आ चुकी हैं।
ऐसे बचें डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से
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कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती
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पुलिस, CBI, ED या कोर्ट कभी ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर नहीं करवाते
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डराने वाले कॉल आते ही परिवार और पुलिस को तुरंत सूचना दें
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अनजान लिंक, नोटिस या बैंक डिटेल शेयर न करें
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साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत शिकायत करें