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Pradosh Vrat July 2025: भगवान शिव को प्रसन्न करने का विशेष दिन, जानें तिथि, महत्व और पूजा विधि...

Pradosh Vrat July 2025: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत पावन और फलदायी व्रत माना गया है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए किया जाता है। त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत जीवन की कई बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। इस व्रत के बारे में उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज बताते हैं कि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। साथ ही कर्ज, मानसिक तनाव और रोगों से छुटकारा भी मिलता है। Read More: Lord Jagannath return journey: मौसी के घर से विदा होंगे भगवान जगन्नाथ… जानिए बहुदा यात्रा की पूरी पूजा विधि और महत्व

क्यों रखा जाता है प्रदोष व्रत?

शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को किया जाता है, जो हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष में दो बार आती है। इस दिन उपवास करके और शिव परिवार की विधिवत पूजा-अर्चना करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि आर्थिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी कष्टों से भी मुक्ति मिलती है।

जुलाई 2025 में कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत?

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 7 जुलाई 2025 को रात 11:10 बजे से होगी, और यह तिथि 8 जुलाई 2025 को रात 12:38 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार प्रदोष व्रत 8 जुलाई को रखा जाएगा। यह व्रत मंगलवार को पड़ रहा है, इसलिए यह भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा। शास्त्रों में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि इस दिन शिवजी का दर्शन, पूजा और व्रत करने से ऋण जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

भौम प्रदोष व्रत का महत्व...

पुराणों में वर्णन है कि त्रयोदशी के दिन संध्या काल में भगवान शिव पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं और जो भक्त उनका व्रत करता है, उसकी सभी समस्याएं समाप्त होती हैं। भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में चल रही आर्थिक परेशानियां समाप्त होती हैं। इस दिन भगवान शिव के दर्शन और पूजा से कर्ज से मुक्ति का मार्ग बनता है। पुराणों में वर्णन है कि त्रयोदशी की शाम प्रथम प्रहर में शिव दर्शन और अभिषेक करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।

व्रत के नियम और पूजन विधि..

पंडित आनंद भारद्वाज बताते हैं कि भौम प्रदोष व्रत में इन नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए 1. स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें। 2. शिवलिंग का अभिषेक: पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और शक्कर) से भगवान शिव का अभिषेक करें। 3. पूजा सामग्री: बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, धूप, दीप और भस्म भगवान शिव को अर्पित करें। 4. कथा और चालीसा: प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें और अंत में शिव चालीसा व आरती करें। 5. उपवास पारण: पूजा के बाद फलाहार करें या अगले दिन व्रत का पारण करें।

इन बातों का रखें ध्यान...

1. दिन में सोना, झूठ बोलना और मांसाहार इस दिन वर्जित माना जाता है। 2. पूजा में केवल सात्विक चीजें ही अर्पित करें। 3. शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प, गंगाजल अर्पित करें।